अनूपपुर। जिले के पुष्पराजगढ़ क्षेत्र के बैगा गांवों को बेहतर आवागमन कराने के लिए प्रधानमंत्री जन मन ग्राम (Road Plan) के अंतर्गत 5.30 किलोमीटर लंबी कोहका–गर्जनबीजा सड़क का निर्माण कराया गया है। 3 करोड़ 1 लाख 16 हजार रुपये की लागत वाली इस परियोजना का निर्माण कार्य 6 मार्च 2025 से शुरू होकर 5 मार्च 2026 तक पूर्ण किया गया है।
इस सड़क की निर्माण एजेंसी मेसर्स जय माता दी कंस्ट्रक्शन बुढ़ार, और इस कार्य में निगरानी रखने का काम कंसल्टेंसी मेसर्स परी इंजीनियरिंग एसोसिएट सिवनी तथा कार्यकारी एजेंसी मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क प्राधिकरण PIU अनूपपुर का रहा है।
लेकिन सड़क की मौजूदा हालत देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर गुणवत्ता की निगरानी किसने की है? पहली ही बारिश में सड़क पर दरारें, बारिश में सड़क का पानी में बह जाना, उखड़ता डामर और कमजोर पुलिया निर्माण यह संकेत दे रहे हैं कि कहीं विकास की इस सड़क पर भ्रष्टाचार की मोटी परत तो नहीं बिछा दी गई है।
दरअसल जनजातीय बहुल बैगा अंचल को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जन मन ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई कोहका–गर्जनबीजा सड़क अब खुद व्यवस्था पर सवाल बनकर खड़ी है। करीब 3 करोड़ 1 लाख 16 हजार रुपये की लागत से बनी यह सड़क महज चार महीने में ही जगह-जगह दरकने लगी है। ग्रामीणों का दावा है कि सड़क की परत हाथों से उखड़ रही है और पुलियाओं का निर्माण पहली ही बारिश में घटिया गुणवत्ता की गवाही दे रहा है।
चार महीने में ही दम तोड़ गई करोड़ों की सड़क
सरकारी रिकॉर्ड में यह सड़क नई और हाल ही में बनाई गई है, लेकिन जमीनी हकीकत में इसकी उम्र मानो वर्षों पुरानी दिखाई देती है। जगह-जगह दरारें, पहली ही बारिश सड़क का बह जाना, उखड़ती सतह और गड्ढे यह बता रहे हैं कि निर्माण में गुणवत्ता के मानकों का पालन गंभीरता से नहीं किया गया है। जिन्हें इस सड़क की देखरेख की जिम्मेदारी मिली वह मिलीभगत में शामिल है यह हम नहीं यह कार्य की गुणवत्ता बता रहा है करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की यह हालत बैगा समुदाय में आक्रोश पैदा कर रही है।
हाथ लगाया और उखड़ गई सड़क, गुणवत्ता पर बड़ा सवाल
बैगा समुदाय का आरोप है कि सड़क की डामर परत इतनी कमजोर है कि उसे हाथ से ही उखाड़ा जा सकता है।तस्वीर भी बया कर रही है तो यह केवल तकनीकी खामी नहीं बल्कि निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं। और यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किन जिम्मेदारो ने अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से नहीं किया है।
पहली बारिश में पुलियाओं ने खोल दी निर्माण की पोल
बारिश शुरू होते ही पुलियाओं और सड़क के किनारों पर अति क्षति दिखाई देने लगी है। कई स्थानों पर कटाव और निर्माण की कमजोर स्थिति सामने आई है। इससे भविष्य में आवागमन प्रभावित होने और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। सवाल यह है कि यदि पहली बारिश में ही यह स्थिति है तो आने वाले वर्षों में सड़क का क्या होगा?
बैगा विकास के नाम पर कहीं विकास से समझौता तो नहीं?
यह सड़क विशेष रूप से बैगा समुदाय के गांवों को जोड़ने के उद्देश्य से बनाई गई थी। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं तो यह केवल एक सड़क का मामला नहीं बल्कि जनजातीय विकास योजनाओं की विश्वसनीयता से भी जुड़ा विषय है। जरूरत है कि जिम्मेदार एजेंसियां तत्काल निरीक्षण करें और जिम्मेदारी तय की जाए।
जांच होगी या फिर फाइलों में दब जाएगा मामला?
अब निगाहें जिला प्रशासन और मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क प्राधिकरण पर टिकी हैं। यदि सड़क वास्तव में मानकों के विपरीत बनी है तो संबंधित ठेकेदार, कंसल्टेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या नहीं यह देखने वाली बात होगी। करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि से बने कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। निष्पक्ष तकनीकी जांच ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है। जिससे बैगा समुदाय अपने आप की प्रधानमंत्री जन मन योजना से ठगा हुआ महसूस न कर सकें।











