नई दिल्ली/रायपुर। बलौदाबाजार हिंसा प्रकरण में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल (Amit Baghel) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने अमित बघेल के साथ सह-आरोपी अजय यादव और दिनेश वर्मा को भी सशर्त जमानत प्रदान करने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले के साथ ही तीनों आरोपियों की रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए अमित बघेल पर विशेष शर्त भी लगाई है। आदेश के अनुसार, वह अगले तीन माह तक रायपुर जिले की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे तथा इस अवधि के दौरान उन्हें जिले से बाहर ही रहना होगा।
राज्य सरकार ने किया था जमानत का विरोध
सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि इस प्रकरण के अन्य आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि अमित बघेल की हिरासत अवधि अपेक्षाकृत कम रही है। राज्य सरकार ने इसी आधार पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने का भी उल्लेख किया।
हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल हिरासत की अवधि किसी आरोपी को जमानत से वंचित रखने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती। इसी टिप्पणी के साथ न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए तीनों आरोपियों को जमानत देने का निर्देश दिया।
बचाव पक्ष ने साक्ष्यों पर उठाए सवाल
बचाव पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि अमित बघेल को मामले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया, लेकिन जांच के दौरान इस आरोप के समर्थन में पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। यह भी तर्क दिया गया कि मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और जांच से संबंधित आवश्यक दस्तावेज रिकॉर्ड पर उपलब्ध हैं। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक न्यायिक हिरासत में रखना उचित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने इन तथ्यों पर विचार करते हुए जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
अन्य मामलों में भी दर्ज हैं प्रकरण
अमित बघेल के विरुद्ध बलौदाबाजार हिंसा मामले के अलावा रायपुर के वीआईपी चौक स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा से जुड़े विवाद तथा सिंधी समाज के आराध्य के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी सहित अन्य प्रकरण भी दर्ज हैं। इन मामलों में उन्हें विभिन्न चरणों में संबंधित न्यायालयों से राहत मिल चुकी है।
हाईकोर्ट का आदेश किया निरस्त
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के साथ ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने का आदेश निरस्त हो गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चार्जशीट दाखिल हो जाने और जांच पूरी होने की स्थिति में, उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद बलौदाबाजार हिंसा मामले में अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश वर्मा की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। मामले का परीक्षण अब निचली अदालत में विधि सम्मत प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगा।










