अमेरिका ने ईरान में भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर लिया हमला, कंट्रोल टावर ढहा, ईरान में एयरस्ट्राइक आज भी जारी

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब भारत के रणनीतिक हितों को सीधे प्रभावित करने लगा है। अमेरिकी एयरस्ट्राइक (US airstrike)  में ईरान के चाबहार बंदरगाह को निशाना बनाया गया जिसमें पोर्ट का निगरानी (कंट्रोल) टावर ढह गया। यह हमला लगातार छठी रात किया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हमले के बाद टावर के क्षतिग्रस्त होने की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की। ईरानी मीडिया ने चाबहार पोर्ट पर तीसरे हमले की पुष्टि की है, हालांकि टावर पूरी तरह ढहने पर अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है।

चाबहार क्यों है इतना अहम?

चाबहार बंदरगाह भारत, ईरान और अफगानिस्तान के लिए बेहद रणनीतिक महत्व रखता है। भारत ने इस बंदरगाह के विकास में भारी निवेश किया है। यह पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक भारत को सीधी पहुंच देता है। भारत की कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) इसका संचालन कर रही है। 2024 में भारत और ईरान ने 10 साल का दीर्घकालिक समझौता भी किया था।

हमले का असर, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं

चाबहार पोर्ट पर निगरानी टावर ढहने से बंदरगाह की कमर्शियल गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि हमलों में तटीय निगरानी केंद्र, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इधर अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। एशियाई शेयर बाजार भी गिरावट के साथ खुले हैं।

चीन और पाकिस्तान की अपील

चीन और पाकिस्तान ने दोनों देशों से बातचीत फिर शुरू करने की अपील की है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि संकट का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि संवाद से निकलना चाहिए। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। उसने ओमान और कुवैत में अमेरिकी रडार व सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों का दावा किया है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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