भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, चुनाव याचिका पर हाईकोर्ट में ही होगी सुनवाई

नई दिल्ली। 2023 के पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने उनकी याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि, भूपेश बघेल की ओर से उठाई गई चुनाव याचिका की समय-सीमा से जुड़ी आपत्ति पर हाईकोर्ट कानून के मुताबिक विचार कर सकता है।

45 दिन की समय-सीमा का मुद्दा

भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81 के तहत चुनाव याचिका 45 दिन के भीतर दाखिल होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि पाटन चुनाव का परिणाम 3 दिसंबर 2023 को घोषित हुआ था और 45 दिन की अवधि 17 जनवरी 2024 को खत्म हो गई।

सिब्बल ने कोर्ट के सामने विजय बघेल के हलफनामे की तारीख का भी हवाला दिया। उनके मुताबिक हलफनामे पर 22 जनवरी 2024 की तारीख है। उन्होंने कहा कि इस आधार पर चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज किया जाना चाहिए था।

कोर्ट ने पूछा- आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई?

सुनवाई के दौरान पीठ ने पूछा कि यह आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई गई। सिब्बल ने माना कि यह मुद्दा इस स्तर पर उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह उनकी चूक है, लेकिन संबंधित हलफनामा पहले से रिकॉर्ड में मौजूद है और उसकी तारीख पर गौर किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि हलफनामे की तारीख और उससे जुड़े कानूनी असर को रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर देखा जाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कार्यवाही में हस्तक्षेप का आधार नहीं पाया।

क्या है पूरा मामला?

भाजपा नेता विजय बघेल ने 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से भूपेश बघेल की जीत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि मतदान खत्म होने से पहले की 48 घंटे की प्रचार-निषेध अवधि में भूपेश बघेल ने चुनाव प्रचार किया था।

हाईकोर्ट पहले ही मामले को सुनवाई के लिए आगे बढ़ा चुका है। जून 2026 के आदेश में कोर्ट ने कहा था कि याचिका की स्थिरता और लगाए गए आरोपों से जुड़े कई सवाल साक्ष्यों के आधार पर तय किए जाने हैं।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद पाटन चुनाव से जुड़ी याचिका पर आगे की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में होगी। समय-सीमा, याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया और आरोपों से जुड़े सवालों पर फैसला रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर होगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से भूपेश बघेल का चुनाव रद्द या बरकरार रखने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

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