रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन प्रश्नकाल के दौरान नवा रायपुर स्थित सेवाग्राम प्रोजेक्ट (Sevagram Project) को लेकर सदन का माहौल गर्म हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
बहस के दौरान कई बार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा। अंत में अजय चंद्राकर ने अपने शब्दों पर खेद जताया, जिस पर भूपेश बघेल ने ‘धन्यवाद’ कहकर बात समाप्त की।
अजय चंद्राकर ने सेवाग्राम परियोजना की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछली सरकार में लोकधन का दुरुपयोग हुआ। उन्होंने पूछा कि एनआरडीए परिसर में 700 बिस्तरों की क्षमता वाले हॉस्टल को 350 बिस्तरों की क्षमता तक कब शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी पूछा कि आईटीआई परिसर में प्रस्तावित 22 करोड़ रुपये की लागत वाले कार्य कब शुरू होंगे।
चंद्राकर ने दावा किया कि सेवाग्राम के लिए 129 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए, लेकिन 104 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना अधूरी है।इस पर भूपेश बघेल के खड़े होकर बोलने पर अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताई और कहा कि पहले मंत्री को जवाब आ जाने दीजिए।
इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कई बार तीखी टिप्पणियां हुईं। अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित रखने के लिए दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह दी। संसदीय कार्य मंत्री और अन्य सदस्यों ने भी बीच-बचाव किया।
भूपेश बघेल ने डॉ. रमन सिंह को कहा – रहने दीजिए अध्यक्ष महोदय
दोनों के बीच हुई बहस के बाद डॉ. रमन सिंह ने भूपेश बघेल को बोलने के लिए कहा, लेकिन भूपेश बघेल बोले कि रहने दीजिए अध्यक्ष महोदय और बैठ गए।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भी माहौल हल्का करते हुए टिप्पणी की कि, ‘अभी तक चाचा और गुरु रहे हैं, अब दुश्मन लग रहे हैं।’
इस पर भूपेश बघेल बोले, ‘दूसरों के प्रश्न में खड़ा होना इनका अधिकार है और इनके प्रश्न पर खड़े हुए तो इनको आपत्ति है।‘
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बहुत देर हो गया। चलिए जवाब दे दीजिए।
इस पर ओपी चौधरी खड़े हुए और जवाब दिया कि इसका बेहतर संचालन कैसा हो, लोकहित में परिणाम आए, इसकी चिंता करेंगे।
लंबी बहस के बाद अजय चंद्राकर ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने अपनी टिप्पणी पर खेद व्यक्त किया। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ‘धन्यवाद’ कहा, जिसके बाद सदन में यह विवाद समाप्त हुआ।
आखिर सेवाग्राम प्रोजेक्ट है क्या?
दरअसल, भूपेश बघेल सरकार ने नवा रायपुर में महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज और स्वावलंबन के विचारों पर आधारित ‘सेवाग्राम’ विकसित करने की योजना बनाई थी।
इसका उद्देश्य सिर्फ एक भवन बनाना नहीं, बल्कि युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और शोधकर्ताओं के लिए एक ऐसा केंद्र तैयार करना था, जहां प्रशिक्षण, शोध, सामाजिक गतिविधियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम एक ही परिसर में संचालित हो सकें।
परियोजना के तहत 700 बिस्तरों वाला हॉस्टल, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, बिजनेस और कॉन्फ्रेंस सेंटर, आईटीआई परिसर, और कलाकारों व विशेषज्ञों के ठहरने की व्यवस्था विकसित की जानी थी।
हालांकि, सरकार बदलने के बाद यह परियोजना राजनीतिक विवाद का विषय बन गई। भाजपा का आरोप है कि 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने के बावजूद परियोजना अपने उद्देश्य तक नहीं पहुंच सकी, जबकि कांग्रेस इसे गांधीवादी सोच पर आधारित एक दूरदर्शी परियोजना बताती रही है।









