रायपुर। Chhattisgarh विधानसभा में 16 जुलाई निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए न्यूनतम भूमि की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के प्रस्ताव का स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने कड़ा विरोध किया है। संगठन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा को निजी हितों के हवाले कर रही है और यह फैसला शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला है।
SFI के जिलाध्यक्ष गर्व गभने, जिलासचिव हर्ष संघाणी और उपाध्यक्ष अल्पिका कन्नौजे ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि राज्य में पहले से कई निजी विश्वविद्यालयों पर अनियमितताओं और फर्जी डिग्री बांटने के आरोप लगते रहे हैं। संगठन का दावा है कि शिकायतों के बावजूद उच्च शिक्षा विभाग, विनियामक आयोग और संबंधित संस्थाओं ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। SFI ने आरोप लगाया कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच के बजाय शिकायतकर्ताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है।
क्या है नया प्रावधान?
SFI के अनुसार, विधानसभा में पारित प्रस्ताव के बाद अब छत्तीसगढ़ में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए न्यूनतम भूमि रखने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। संगठन का कहना है कि यह स्थिति ऐसी है जिसमें स्कूल और कॉलेज खोलने के लिए भूमि की शर्त बनी रहेगी लेकिन निजी विश्वविद्यालय बिना भूमि के भी स्थापित किए जा सकेंगे।
UGC के नियमों का दिया हवाला
SFI ने अपने बयान में कहा कि विश्वविद्यालयों से संबद्ध नए कॉलेजों के लिए UGC के Regulations for Grant of Affiliation to Colleges by Universities, 2023 के तहत महानगरों में कम से कम 2 एकड़ और अन्य क्षेत्रों में 5 एकड़ भूमि का प्रावधान है। संगठन का दावा है कि अधिकांश राज्यों में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए भी न्यूनतम भूमि की स्पष्ट शर्त लागू है।
दूसरे राज्यों से तुलना
SFI ने कहा कि आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, ओडिशा, कर्नाटक और अन्य राज्यों में निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए 5 एकड़ से लेकर 100 एकड़ तक भूमि की अनिवार्यता है। संगठन का दावा है कि यदि यह संशोधन लागू होता है तो छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य बन जाएगा, जहां निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए न्यूनतम भूमि की कोई शर्त नहीं रहेगी।
SFI ने भाजपा पर राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि वर्ष 2003 में तत्कालीन अजीत जोगी सरकार के दौरान स्थापित निजी विश्वविद्यालयों को भाजपा ने ‘दो कमरे की यूनिवर्सिटी’ कहकर विरोध किया था जबकि अब वही सरकार भूमि की अनिवार्यता खत्म कर ऐसे संस्थानों का रास्ता खोल रही है।
SFI की मांग
संगठन ने राज्य सरकार से इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की है। साथ ही उच्च शिक्षा विभाग और निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की है।










