रायपुर। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में पहली बार ओपन जेल (खुली जेल) की स्थापना होने जा रही है। राज्य सरकार ने बेमेतरा जिले के ग्राम पथर्रा में खुली जेल स्थापित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। उप मुख्यमंत्री और जेल मंत्री विजय शर्मा की मंजूरी के बाद मंगलवार को जेल विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी की।
करीब 10.20 हेक्टेयर भूमि में निर्मित इस ओपन जेल में 200 कैदियों को रखने की क्षमता होगी। यहां केवल अच्छे आचरण वाले और कम सुरक्षा जोखिम वाले सजायाफ्ता कैदियों को रखा जाएगा। जेल विभाग का उद्देश्य बंदियों का पुनर्वास, सामाजिक पुनर्स्थापन और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
पारंपरिक जेलों के विपरीत इस खुली जेल में पात्र कैदियों को सीमित निगरानी में रखा जाएगा। उन्हें चारदीवारी में बंद नहीं रखा जाएगा, बल्कि निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत बाहर जाकर काम करने की अनुमति मिलेगी। हालांकि तय समय पर रोल कॉल (हाजिरी) देना अनिवार्य होगा और जेल के सभी नियमों का पालन करना पड़ेगा।
जेल परिसर में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, आवास, भोजन, पेयजल, चिकित्सा, मनोरंजन की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही जेल कर्मियों के लिए क्वार्टर और बैरकों की भी व्यवस्था की गई है।
इन कामों में लगाया जाएगा कैदियों को
ओपन जेल में बंदियों को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के लिए विभिन्न गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इनमें गौशाला और डेयरी संचालन, सब्जी उत्पादन और बागवानी, मछली पालन, कुक्कुट पालन और पशुपालन, स्क्रीन प्रिंटिंग, एलईडी बल्ब और ट्यूब लाइट निर्माण, फेब्रिकेशन कार्य, भवन निर्माण, काष्ठ कला, सिलाई और बुनाई, बुक बाइंडिंग, कंप्यूटर संचालन, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और राजमिस्त्री का प्रशिक्षण, कुटीर उद्योग से जुड़े कार्य किए जाएंगे। प्रशिक्षण के बाद बंदियों को इन क्षेत्रों में जीविकोपार्जन के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
कौन-कौन से कैदी रह सकेंगे?
प्रारंभिक चरण में ऐसे सजायाफ्ता कैदियों को इस जेल में रखा जाएगा, जिन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई है। इनमें ऐसे कैदी रखे जाएंगे, 11 वर्ष या उससे अधिक की सजा अच्छे आचरण के साथ पूरी कर चुके हैं। इन कैदियों का जेल रिकॉर्ड अनुशासित रहा हो। ऐसे कैदी, जिनके दोबारा गंभीर अपराध करने की आशंका न हो और जिनकी सामाजिक पृष्ठभूमि सकारात्मक रही हो।
बंदी की पात्रता का अंतिम निर्णय डीजी जेल की अध्यक्षता वाली समिति करेगी।
बाहर जाकर काम करने और कारोबार की सुविधा
खुली जेल में रहने वाले पात्र कैदियों को खेतों और कम जोखिम वाले उद्योगों में काम करने की अनुमति होगी। इसके अलावा दिन के समय वे नियमों के तहत वैध व्यवसाय भी कर सकेंगे।
इसके लिए बेमेतरा-सिमगा मुख्य मार्ग पर जिला प्रशासन के सहयोग से ‘आस्था कैफे’ और ग्रॉसरी शॉप संचालित की जाएगी। वहीं, जेल के मुख्य द्वार के पास बने एंपोरियम में बंदियों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री भी होगी।
परिवार से मिलने की अधिक आजादी
ओपन जेल में बंदियों को पारंपरिक जेलों की तुलना में अपने परिवार से मिलने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। जेल विभाग का मानना है कि इससे पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे और बंदियों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।
जेल विभाग ने बताया कि रिहाई के बाद बंदियों के पुनर्वास के लिए भी व्यवस्था की गई है। इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ हुए एमओयू के तहत पात्र बंदियों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री और डीजी जेल ने क्या कहा?
उप मुख्यमंत्री एवं जेल मंत्री विजय शर्मा ने विश्वास जताया कि खुली जेल की अवधारणा के अनुरूप जेल विभाग बंदियों के सुधार और पुनर्वास की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करेगा।
डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने कहा कि बेमेतरा स्थित खुली जेल का मुख्य उद्देश्य बंदियों का पुनः सामाजिक समावेशन, मानवाधिकारों की रक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। उनका कहना है कि भारतीय न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि अपराधियों का सुधार और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है।









