रायपुर। छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। फर्जी दस्तावेज जमा करने के आरोप में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा पहले रद्द की गई पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों की मान्यता अब वापस मिल गई है। इन कॉलेजों में इसी सत्र से 50-50 सीटों पर MBBS की पढ़ाई शुरू होने वाली है। कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, दंतेवाड़ा और कुनकुरी में प्रस्तावित इन पांचों मेडिकल कॉलेजों की कुल 250 नई MBBS सीटें बढ़ जाएंगी।

क्या था पूरा मामला?
कुछ समय पहले NMC ने इन पांचों कॉलेजों को फर्जी दस्तावेज जमा करने और अधूरी बुनियादी सुविधाओं (इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ एवं अस्पताल) के आधार पर मान्यता देने से इनकार कर दिया था। NMC की टीम की जांच में कमी पाए जाने के बाद मान्यता रद्द कर दी गई थी। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार ने 24 जून 2026 को इन पांचों जगहों पर डीन (अधिष्ठाता) और अस्पताल अधीक्षक की नियुक्ति कर दी थी, जिस पर सवाल उठे थे।
अब मिली मंजूरी
स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने इस विकास को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, ‘प्रदेश में पहली बार एक साथ पांच नए मेडिकल कॉलेजों की अनुमति मिलना बड़ा उपलब्धि है। इससे MBBS सीटों में 250 की बढ़ोतरी होगी।’ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने NMC की शुरुआती अस्वीकृति के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर मामले को उठाया था। सरकार का कहना है कि कमियों को दूर कर नई जानकारी और दस्तावेज जमा करने के बाद NMC ने अब मान्यता दे दी है।
नए मेडिकल कॉलेजों की मंजूरी पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ में पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को NMC से मंजूरी मिलने पर कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने एक तरफ शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह हर्ष का विषय है लेकिन इसके साथ ही उन्होंने गंभीर चिंता जताई कि जश्न के बीच प्रदेश के मौजूदा मेडिकल कॉलेजों में शिक्षा और सुविधाओं की लगातार गिरावट हो रही है। उन्होंने राजनंदगांव मेडिकल कॉलेज का उदाहरण देते हुए कहा कि छात्रावास में पलंग की जगह तख्त लगाए जा रहे हैं जिन्हें तीन साल पहले और हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के क्षेत्र में उपलब्ध कराया गया है।

डॉ. गुप्ता ने पूछा कि हम भावी डॉक्टरों को किस स्तर की शिक्षा दे रहे हैं जबकि हम खुद अपने माता-पिता के इलाज के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डॉक्टर चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ नए कॉलेज खोलने से काम नहीं चलेगा बिना गुणवत्ता के यह सिर्फ संख्या बढ़ाना भर है और इस मुद्दे पर गंभीर विमर्श की जरूरत है।










