अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, अब रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर नया खतरा, भारत के लिए चिंता

लेंस डेस्क। अमेरिका और ईरान (US-Iran War) के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध विराम खत्म होने की घोषणा कर दी है। इस खबर से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। इसी बीच भारत के लिए एक नई चिंता की खबर आई है। अमेरिका के चार वरिष्ठ सीनेटरों ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए नया कानून लाने का ऐलान किया है।

क्या है नया प्रस्ताव?

अमेरिकी सीनेट के चार प्रभावशाली सीनेटरों रिचर्ड ब्लूमेंथल और जीन शाहीन (डेमोक्रेटिक पार्टी) तथा लिंडसे ग्राहम और रोजर विकर (रिपब्लिकन पार्टी) ने शुक्रवार 10 जुलाई 2026 को संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वे ट्रंप प्रशासन के साथ इस मामले पर सहमति बना चुके हैं। सीनेटरों का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध अभी भी जारी है। रूस को तेल और गैस बेचकर जो कमाई हो रही है, वह युद्ध को लंबा खींच रही है। इसलिए अब उन देशों पर भी सख्त प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए जो रूस से तेल और नेचुरल गैस खरीद रहे हैं।

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। पिछले कुछ सालों में भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात किया है। अगर अमेरिका यह नया कानून पास कर देता है तो भारत पर भी दबाव बढ़ सकता है। इससे भारत को सस्ता तेल मिलना मुश्किल हो सकता है और तेल की कीमतें बढ़ने से आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ सकता है।

दुनिया भर में तेल की कीमतों में उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की खबर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ा तो तेल की कीमतें और भी ऊपर जा सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ेगा।

सीनेटरों ने कहा कि वे ट्रंप प्रशासन के साथ इस नए कानून को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारत जैसे देशों को इस कानून से छूट मिलेगी या नहीं।

भारत सरकार पिछले कुछ सालों से रूस से सस्ता तेल खरीदकर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश कर रही है। अगर अमेरिका नए प्रतिबंध लगाता है तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों से महंगे तेल खरीदने पड़ सकते हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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