रायपुर। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित जामडीपाठ आश्रम (Balod Kaushalya Dham) को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में कथित अतिक्रमण के आरोपों के बीच प्रशासन ने बुधवार को आश्रम परिसर में बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी। सुबह से ही पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है और आश्रम तक पहुंचने वाले मार्गों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है।
मौके पर कलेक्टर दिव्या मिश्रा, पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल और वनमंडलाधिकारी अभिषेक अग्रवाल सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की निगरानी में पाटेश्वर धाम के जलकैना क्षेत्र के पास निर्मित बाउंड्री वॉल पर बुलडोजर चलाया गया।
देवस्थल पहुंचे आदिवासी, किया पूजा-पाठ
कार्रवाई के बीच आदिवासी समाज के लोग अपने पारंपरिक देवस्थल पर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। समाज के लोगों का कहना है कि यह स्थल उनकी आस्था, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी रक्षा के लिए वे लगातार आवाज उठा रहे हैं।
इसी बीच आदिवासी समाज ने पूरे मामले को लेकर आगामी 20 जून को ‘संरक्षण जातरा’ निकालने का आह्वान किया है। माना जा रहा है कि प्रशासन की मौजूदा कार्रवाई को इस प्रस्तावित आयोजन और बढ़ते सामाजिक दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
विधायक अनिला भेड़िया ने साधा निशाना
मामले को लेकर डौंडी लोहारा विधायक और पूर्व मंत्री अनिल भेड़िया ने खुलकर आदिवासी समाज का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई आदिवासी या किसान थोड़ी सी जमीन के लिए पट्टे की मांग करता है तो उसे वर्षों तक भटकना पड़ता है, लेकिन यहां बिना आवश्यक अनुमति और विभागीय अनापत्ति प्रमाण पत्र के बड़े क्षेत्र में निर्माण कार्य कर लिया गया।
विधायक ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं के कार्य भी संबंधित पंचायतों पर दबाव बनाकर वहां कराए गए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और देवस्थल से जुड़े अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती और वे इस मुद्दे पर समाज के साथ खड़ी हैं।
प्रशासन की सुलह कोशिश नाकाम
सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने आदिवासी समाज और संत बाबा बालक दास के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया था, लेकिन बातचीत से कोई समाधान नहीं निकल सका।
वहीं संत बाबा बालक दास ने अब तक सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है। हालांकि उन्होंने अनौपचारिक बातचीत में इतना जरूर कहा है कि संवाद के लिए उनके द्वार हमेशा खुले हैं और संत का पक्ष निष्पक्ष होता है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
संभावित विरोध और 20 जून को प्रस्तावित संरक्षण जातरा को देखते हुए प्रशासन ने आश्रम से लगभग पांच किलोमीटर पहले से ही सुरक्षा घेरा बना दिया है। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है।
फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई जारी है, जबकि आदिवासी समाज अपने धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण की मांग पर अड़ा हुआ है। ऐसे में 20 जून का प्रस्तावित आयोजन इस पूरे विवाद की अगली बड़ी कड़ी साबित हो सकता है।
2020 में वन विभाग दे चुका है नोटिस
वन विभाग ने साल 2020 में ही यहां अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया था। इसके बाद न वन विभाग ने कोई कार्रवाई की, न प्रशासन ने कोई रुख साफ किया। अब वही निर्माण भव्य रूप ले रहा है। स्थानीय चर्चा है कि दिसंबर में यहां एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें पीएम मोदी समेत कई बड़े नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। निर्माण की भव्यता को लेकर यही अटकलें लगाई जा रही हैं।
द लेंस की पूरी रिपोर्ट में आप इस मामले के दस्तावेज और ग्राउंड रिपोर्ट देख सकते हैं।











