दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलसचिव की ‘फर्जी PhD’ पर घमासान: जांच समिति पर ही भड़की SFI, बोली- ‘अपने लोगों को बचाने की कोशिश’

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रायपुर। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप की कथित फर्जी PhD डिग्री का मामला अब और गरमा गया है। छात्र संगठन SFI ने जांच समिति के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए पूरी जांच प्रक्रिया और समिति की निष्पक्षता पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

SFI जिला अध्यक्ष गर्व गभने और जिला सचिव हर्ष संघाणी ने बताया कि संगठन की शिकायत पर गठित जांच समिति ने SFI को दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के लिए पत्र भेजा था। इसके बाद संगठन की ओर से राज्य सचिवमंडल सदस्य दुष्यंत साहू जांच समिति के सामने पेश हुए और विस्तृत अभ्यावेदन सौंपा।

SFI ने आरोप लगाया कि जांच समिति निष्पक्ष नहीं है और पूरे मामले में ‘लीपापोती’ कर भारती विश्वविद्यालय और कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को बचाने की कोशिश की जा रही है।

SFI ने समिति के तीनों सदस्यों पर आपत्ति जताई। संगठन का आरोप है कि समिति के संयोजक डॉ. व्यास दुबे के कुलदीप से पुराने कार्यालयीन संबंध रहे हैं। वहीं दूसरे सदस्य डॉ. एस.के. गुप्ता को कुलदीप का करीबी बताया गया है। तीसरे सदस्य डॉ. एम.एल. नायक को कुलदीप का पूर्व शिक्षक बताते हुए SFI ने कहा कि ऐसे में निष्पक्ष जांच संभव नहीं दिखती।

संगठन ने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष करनी है तो सबसे पहले कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को उनकी पीएचडी से जुड़े सभी मूल दस्तावेजों के साथ समिति के सामने बुलाया जाना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय शिकायतकर्ता से ही दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।

SFI ने अपने अभ्यावेदन में कई गंभीर बिंदु उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि भूपेंद्र कुलदीप ने शासन और कुलपति की पूर्व अनुमति लिए बिना पीएचडी में पंजीयन कराया, जो UGC और सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन है।

इसके अलावा संगठन ने दावा किया कि कुलदीप ने कोर्स वर्क से बचने के लिए सीवी रमन विश्वविद्यालय से संदिग्ध तरीके से एमफिल डिग्री हासिल की। SFI के मुताबिक दोनों सेमेस्टर की अंकसूचियां एक ही दिन जारी होना प्रक्रियागत रूप से असंभव है।

SFI ने यह भी आरोप लगाया कि कुलदीप की रिसर्च गाइड डॉ. लुमेश्वरी साहू उस समय खुद शोधार्थी थीं और नियमित प्राध्यापक भी नहीं थीं। ऐसे में वे UGC नियमों के अनुसार पीएचडी गाइड बनने की पात्र नहीं थीं।

संगठन ने यह भी कहा कि कुलदीप ने महज 22 महीने में पीएचडी पूरी कर ली, जबकि UGC नियमों के मुताबिक न्यूनतम अवधि 36 महीने अनिवार्य है।

SFI ने दावा किया कि प्रस्तुत तथ्यों से प्रथम दृष्टया कुलदीप की पीएचडी डिग्री फर्जी प्रतीत होती है। संगठन ने मांग की है कि पूरे मामले की सूक्ष्म और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

SFI ने चेतावनी दी कि यदि जांच के नाम पर मामले को दबाने की कोशिश की गई तो संगठन आंदोलन तेज करेगा।

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दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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