ट्विटर , मेटा के बाद अब सरकार की एप्पल से भिड़ंत

नई दिल्ली। भारत में एक तरफ सोशल मीडिया कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है दूसरी तरफ एप्पल Apple के सामने कानूनी चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। हालांकि कंपनी भारतीय बाजार के विकास को लेकर अत्यधिक उत्साहित है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के साथ चल रहे एप्पल के एंटीट्रस्ट विवाद और कंपनी के सीईओ टिम कुक के हालिया बयानों से इस पूरे मामले में स्थिति बेहद दिलचस्प हो गई है।


क्या है ​एंटी ट्रस्ट विवाद


​एप्पल और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के बीच यह विवाद ऐप स्टोर के बाजार में कथित तौर पर अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग करने से जुड़ा हुआ है। CCI ने 2024 में एक प्रारंभिक जांच के बाद एप्पल से उसके वित्तीय विवरण साझा करने की मांग की थी। नियमों के अनुसार, इसी आधार पर जुर्माने की राशि तय की जाती है।


​एप्पल की क्या हैं आपत्तियां


एप्पल का तर्क है कि भारत का संपूर्ण एंटीट्रस्ट जुर्माना ढांचा विचाराधीन है और दिल्ली हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी गई है, इसलिए आयोग को अपनी इस मांग को रोक देना चाहिए।​कंपनी का यह भी दावा है कि इस मामले में उसे 38 बिलियन डॉलर तक का संभावित जुर्माना झेलना पड़ सकता है। कंपनी का कहना है कि सरकार एप्पल इंडिया की पूरी आर्थिक स्थिति के दस्तावेज मांग रहीं है।एप्पल ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करते हुए आरोप लगाया है कि CCI अपने कानूनी दायरे से बाहर जाकर कार्य कर रहा है और उसके अधिकारों का हनन कर रहा है।


*​टिम कुक का भारत को लेकर बयान”


​ निवर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) टिम कुक ने भारत के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता और उत्साह जाहिर किया कुक ने भारत को स्मार्टफोन के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार और पीसी (PC) के मामले में तीसरा सबसे बड़ा बाजार बताया। एप्पल ने हाल ही में मुंबई के बोरीवली में अपना छठा भारतीय स्टोर खोला है। कुक ने बताया कि भारत के उभरते हुए मध्यम वर्ग के कारण अधिकांश ग्राहक पहली बार उनके उत्पादों का उपयोग कर रहा।उन्होंने कहा कि कंपनी ने मार्च तिमाही में भारत में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की है।

अमेरिका की प्रायोरिटी लिस्ट में भारत


इस बीच अमेरिका ने भारत को प्रायोरिटी वाच लिस्ट में डाल दिया है।साल की प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में शामिल छह देशों में भारत के अलावा चिली, चीन, इंडोनेशिया, रूस और वेनेज़ुएला हैं।प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में किसी देश को डाले जाने का मतलब : यह उस देश के IP क़ानूनों, एनफोर्समेंट, या US राइट्स होल्डर्स जैसे, पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, ट्रेड सीक्रेट्स के लिए मार्केट एक्सेस को लेकर गंभीर चिंताओं का संकेत देता है।


सोशल मीडिया कंपनियों पर भी भारी दबाव


भारत सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों, जैसे ट्विटर (X) और मेटा (Meta), के बीच कंटेंट हटाने के नए नियमों के अनुपालन और डिजिटल सामग्री के रेगुलेशन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। सरकार ने हाल ही में सख्त आईटी नियमों का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया जा सकता है। सरकार चाहती है कि ये प्लेटफॉर्म डीपफेक और गैरकानूनी कंटेंट को तुरंत हटाएं, जबकि कंपनियां इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ मानती हैं।तकनीकी कंपनियों पर बढ़ते सरकारी नियंत्रण के कारण एप्पल के भारतीय संचालन और उसकी ‘ऐप स्टोर’ नीतियों पर भी प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की नजर है।

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