रायपुर l महिला आरक्षण बिल Women Reservation Bill को लेकर लोकसभा में विपक्ष के रुख के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर एक दिन का विशेष विधानसभा सत्र बुलाने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर में भाजपा की जन-आक्रोश रैली के के दौरान कहा कि यह विशेष सत्र इसी महीने के आखिरी में आयोजित होगा। इस सत्र में लोकसभा में विपक्ष के व्यवहार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
संसद के विशेष सत्र में लाया गया 131वां संविधान संशोधन बिल लोकसभा से पास नहीं हो सका था। इस बिल में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रावधान थे। बिल पर 21 घंटे चर्चा के बाद वोटिंग हुई।
वोटिंग में कुल 528 सांसद शामिल हुए। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। पास होने के लिए 352 वोट चाहिए थे। ऐसे में बिल 54 वोटों से गिर गया।
भाजपा का विरोध प्रदर्शन
इस मुद्दे पर भाजपा ने रायपुर में जन-आक्रोश रैली निकाली। रैली इंडोर स्टेडियम से शुरू होकर सुभाष स्टेडियम में खत्म हुई। इसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, कैबिनेट मंत्री और महिलाएं शामिल हुईं।
सीएम साय ने कहा, ‘पीएम मोदी लगातार महिलाओं के हित में फैसले ले रहे हैं। लेकिन कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने बिल को पास नहीं होने दिया। छत्तीसगढ़ की माताएं-बहनें इससे नाराज हैं।’ उन्होंने विपक्ष को महिला विरोधी भी बताया।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में अब तक पांच विशेष सत्र बुलाए गए हैं। पहला विशेष सत्र 3 जून 2013 को झीरम घाटी नक्सली हमले में शहीद नेताओं को श्रद्धांजलि देने के लिए बुलाया गया। दूसरा सत्र 2-3 अक्टूबर 2019 को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उनके सिद्धांतों पर चर्चा के लिए हुआ।
तीसरा सत्र 27-28 अक्टूबर 2020 को केंद्र के कृषि कानूनों को लेकर राज्य के कानून बनाने के लिए आयोजित किया गया। चौथा विशेष सत्र 1-2 दिसंबर 2022 को ST समेत अन्य वर्गों के लिए 76% आरक्षण का विधेयक पारित करने के लिए बुलाया गया। पांचवां सत्र 18 नवंबर 2025 को राज्य गठन और संसदीय यात्रा के 25 साल पूरे होने की रजत जयंती पर हुआ, जो पुराने विधानसभा भवन का आखिरी सत्र भी था।










