नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) से जुड़े तीन संवैधानिक संशोधन विधेयकों पर जोरदार बहस हुई। नेता विपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान सदन में खूब हंगामा हुआ। स्पीकर ओम बिरला को राहुल गांधी के दौरान कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा।
इसके ठीक एक दिन पहले प्रियंका गांधी का भाषण हुआ था, जिसमें उन्होंने मुस्कुराते हुए पहले सदन को सहज किया और फिर मोदी सरकार पर हमला किया था। लेकिन राहुल गांधी आज इसके ठीक उलट थोड़ा तल्ख नजर आए। उन्होंने कहा कि बीजेपी का मतलब भारत के लोग, देश और सेना नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि ये महिला आरक्षण बिल है ही नहीं, ये भारत का चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2023 में इसी सदन में पास हो चुका बिल अब तक क्यों लटका था। राहुल ने महिलाओं को देश की सेंट्रल फोर्स बताया और अपनी बहन प्रियंका गांधी का जिक्र करते हुए कहा, कि कल जब वह स्पीच दे रही थीं, पांच मिनट में वह किया जो मैं 20 साल में नहीं कर पाया। अमित शाह के चेहरे पर स्माइल आ गई।
उन्होंने आगे कहा, हम सबने अपनी मां, बहन, पत्नी से बहुत कुछ सीखा है। पीएम और मेरी पत्नी नहीं है! मेरी बहन ने अमित शाह को भी हंसा दिया… ये मुझे सीखना है।” राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी, दलित, अल्पसंख्यक और महिलाओं के साथ भेदभाव कर रही है। ये बिल जाति जनगणना को किनारे करने और संविधान के ऊपर मनुवाद को तरजीह देने के लिए है। आप ओबीसी और दलित को हिंदू कहते हैं, लेकिन उन्हें देश में कोई जगह नहीं देते।
राहुल ने दावा किया कि BJP की घटती ताकत के कारण सरकार असम और जम्मू-कश्मीर की तरह अब पूरे देश का नक्शा बदलना चाहती है, इसके लिए संविधान संशोधन चाहिए। “ये देश-विरोधी है। हम आपको ऐसा नहीं करने देंगे। उद्योग-धंधे, निजी क्षेत्र, न्यायपालिका में दलित कहां हैं?”
उन्होंने कहा कि विपक्ष इस बिल को हराएगा। राहुल ने PM मोदी पर ‘बालाकोट का जादूगर’ टिप्पणी भी की, जिससे सदन में हंगामा हो गया। उन्होंने मजाक में कहा, ‘PM और मैं दोनों के पास ‘wife issue’ नहीं है।
किरेन रिजिजू का जवाब
हंगामे के बीच किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के PM पर हमले को असंसदीय बताया। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ दिया कि राजीव गांधी ने OBC आरक्षण का विरोध किया था, जबकि इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी ने परिसीमन से परहेज किया क्योंकि उन्हें इसके खतरे का एहसास था। रिजिजू ने कहा कि बिल संतुलित है, किसी राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं घटेगा और सभी दलों से समर्थन की अपील की।









