पानीपत रिफाइनरी के ठेका मजदूरों के संघर्ष के साथ सीटू ने जताई एकजुटता, ओवरटाइम भुगतान और अन्य मांगों पर जोर

Panipat Refinery Protest

लेंस डेस्‍क। भारतीय ट्रेड यूनियनों के केंद्र (सीटू) ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की पानीपत रिफाइनरी में हड़ताल पर उतरे मजदूरों के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त की है। सीटू ने कहा कि ठेका मजदूरों द्वारा असुरक्षित काम की स्थितियों, शोषण और श्रम अधिकारों के हनन के खिलाफ छेड़ा गया यह साहसिक संघर्ष देश भर के मजदूर वर्ग के लिए प्रेरणादायक है।

सीटू महासचिव एलामारम करीम की ओर से जारी बयान में पार्टी ने कहा है, रिफाइनरी में काम करने वाले ज्यादातर ठेका मजदूर 12 घंटे की लंबी ड्यूटी करने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें उचित ओवरटाइम वेतन नहीं मिल रहा है। वर्षों से वेतन में देरी, भविष्य निधि (पीएफ) और अन्य वैधानिक लाभों से वंचित रखना, साथ ही पेयजल, शौचालय, विश्राम कक्ष और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव जारी है। हाल ही में असुरक्षित परिस्थितियों के कारण हुई मजदूरों की मौत ने इस अमानवीय ठेका प्रथा को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

प्रबंधन की लापरवाही और दमनकारी रवैये की निंदा करते हुए सीटू ने कहा कि इसके बजाय मजदूरों के शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए पुलिस और सीआईएसएफ की बर्बर कार्रवाई की जा रही है। मजदूरों पर एफआईआर दर्ज की गई हैं और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने की कोशिश की जा रही है, जबकि दोषी ठेकेदार और अधिकारी बिना किसी जवाबदेही के घूम रहे हैं।

सीटू ने मजदूरों की प्रमुख मांगों का पूरा समर्थन किया है। सख्ती से 8 घंटे का कार्यदिवस लागू करना। पूर्ण वेतन और ओवरटाइम का तत्काल भुगतान। पारदर्शी सामाजिक सुरक्षा लाभ। कार्यस्थल पर हुई दुर्घटनाओं की जवाबदेही तय करना तथा प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा। बुनियादी सुविधाओं और कार्यस्थल पर गरिमा की बहाली।

सीटू ने इसे देशव्यापी ठेका मजदूरों के संघर्ष का हिस्सा बताया और कहा कि यह मोदी सरकार द्वारा 1 अप्रैल से लागू की जा रही नई श्रम संहिताओं के खिलाफ भी प्रतिरोध है, जो ठेका श्रम को और बढ़ावा देने वाली हैं। पानीपत से आ रही तस्वीरें और वीडियो पूरे देश के मजदूरों में नई ऊर्जा और आशा जगाते दिख रहे हैं।

सीटू ने केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार, आईओसीएल प्रबंधन और मुख्य ठेकेदार से तत्काल अपील की है कि दमन बंद किया जाए, मजदूरों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं, दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाए और मांगों को मानते हुए सार्थक बातचीत के जरिए विवाद सुलझाया जाए।

सीटू ने साफ किया कि वह पानीपत रिफाइनरी के मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा और न्याय मिलने तक एकजुटता के कार्यक्रमों को तेज करेगा। महासचिव एलामारम करीम ने कहा कि फरवरी में हुई आम हड़ताल के ठीक बाद शुरू हुई यह ‘पानीपत की लड़ाई’ पूरे मजदूर वर्ग को और मजबूत संगठित करेगी तथा श्रम अधिकारों की रक्षा के लिए आगे बढ़ाएगी।

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