नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने अमेरिका में आधारित सिख कार्यकर्ता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की विफल साजिश में दोष स्वीकार कर लिया है। उसने न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में तीन संघीय आरोपों पर दोषी कबूल किया है। जिनमें किराए पर हत्या के लिए सुपारी लेना, हत्या के लिए साजिश रचना और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश आदि शामिल हैं। सजा इसी वर्ष बाद में तय होगी।
निखिल की स्वीकृति मोदी सरकार पर राजनयिक, रणनीतिक और राजनीतिक दबाव को और तेज कर देगी, जिसे अब बिना सबूत के आरोप कहकर आसानी से खारिज नहीं किया जा सकेगा।
वेबसाइट द वायर ने इस कुबूलनामे की समीक्षा करते हुए कहा है एक औपचारिक दोष स्वीकारना पहले के “आरोपों” को अदालती रूप से सिद्ध साजिश में बदल देता है ।जिसमें अमेरिकी धरती पर एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की कोशिश शामिल है, जो कैबिनेट सचिवालय में काम करने वाले भारतीय सरकारी कर्मचारी के निर्देश पर की गई थी।
यह वाशिंगटन में न्यूयॉर्क से जवाबदेही की मांग को बढ़ाएगा, जिसमें भारत से विकास यादव और अन्य कथित हैंडलर्स के मामले में सहयोग की मांग शामिल हो सकती है। इससे अमेरिकी कांग्रेस में सुनवाई, प्रतिबंधों के प्रस्ताव, या भविष्य के सहयोग में मानवाधिकार शर्तें लग सकती हैं। ट्रंप प्रशासन इसे मोदी को शर्मिंदा करने और भारत से अधिक भू-राजनीतिक व व्यापारिक रियायतें हासिल करने के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
द वायर का कहना है कि यह दोष स्वीकारना भारत को उन राज्यों की संदिग्ध सूची में शामिल कर देता है जो विदेश में हत्या की साजिश रचते हैं, कनाडा में निज्जर हत्या के मामले की तरह। इससे मोदी सरकार का आतंकवाद के खिलाफ नैतिक ऊँचाई और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में दावा कमजोर होता है।
नागरिक स्वतंत्रता और प्रवासी समूह अब मीडिया या खुफिया रिपोर्टों के बजाय अमेरिकी अदालत के रिकॉर्ड का हवाला देकर कह सकेंगे कि मोदी सरकार राजनीतिक असहमतियों के खिलाफ राज्य शक्ति का दुरुपयोग करती है। इससे पश्चिमी जनमत और थिंक-टैंक में भारत को लोकतंत्र के साथी के रूप में करीब लाने की बहस प्रभावित हो सकती है।
वायर मानता है अमेरिकी एजेंसिया अब सतर्क रहेंगी कि भारतीय पक्ष उत्तर अमेरिका में अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ स्वतंत्र ऑपरेशन चला सकता है।यह अमेरिकी सिस्टम में उन लोगों को नौका देगा जो पहले से कहते हैं कि वाशिंगटन दिल्ली के प्रति बहुत नरम रहा है। अब वे सिद्ध हत्या-के-लिए-सुपाड़ी देने की साजिश का हवाला देकर रिश्ते में सख्त निगरानी और लाल रेखाएँ मांग सकते हैं।
द वायर का कहना है कि निखिल की दोष स्वीकृति पन्नू और अन्य सिख कार्यकर्ताओं के लिए अदालती पुष्टि है कि भारत राज्य समर्थित हत्या अभियान चलाता है। इससे उन्हें अमेरिका और कनाडा की अदालतों, मीडिया, थिंक-टैंक और लॉबिंग में मजबूत मंच मिलेगा।यह मानवाधिकार याचिकाओं, यूनिवर्सल ज्यूरिस्डिक्शन शिकायतों और अजित डोभाल जैसे अधिकारियों के खिलाफ मुकदमों में बढ़ोतरी ला सकता है साथ ही प्रतिबंधों और वॉच-लिस्ट की वकालत। लंबे समय में, एक दोष स्वीकारने का नैरेटिव प्रभाव किसी औपचारिक राजनयिक कदम जितना भारी पड़ सकता है।










