रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के चीफ इंजीनियर विजय कुमार भतपहरी के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्य सचिव विकासशील और PWD सचिव कमलप्रीत सिंह को पत्र लिखकर उन्होंने गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।
इस बार जो चिट्ठी सामने आई है, वह 4 जनवरी 2026 को भेजी गई है। चिट्ठी में कंवर ने आरोप लगाया है कि विजय भतपहरी ने नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया, करोड़ों रुपये के सरकारी धन का दुरुपयोग किया और विभाग की साख को गहरी चोट पहुंचाई। उन्होंने पूरे मामले की CBI से निष्पक्ष जांच, पद से तत्काल हटाने और कथित वित्तीय नुकसान की रिकवरी की मांग की है।
ननकी राम कंवर ने अपने पत्र में यह भी याद दिलाया कि विजय भतपहरी के खिलाफ 2011 और 2015 में EOW/ACB रायपुर में अपराध क्रमांक 56/2011 और 45/2015 दर्ज हो चुके हैं। ये मामले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत दर्ज हुए थे, लेकिन सालों बीत जाने के बावजूद आज तक न तो फैसला हुआ और न ही ठोस कार्रवाई।
कंवर का सीधा आरोप है कि राजनीतिक पहुंच और संरक्षण के चलते इन मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
डीपीसी और पदोन्नति पर भी सवाल
पूर्व गृहमंत्री ने PWD की पदोन्नति प्रक्रिया डीपीसी पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 2007 की स्थिति के अनुसार अधीक्षण अभियंता सिविल की रिव्यू डीपीसी आयोग से होनी थी, जिसकी तिथि 27 दिसंबर 2010 तय थी।
इसके बावजूद लंबित भ्रष्टाचार मामलों को छिपाकर अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता संदेह के घेरे में आ गई।
पत्र में कंवर ने उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 1992 में विशेष भर्ती अभियान के तहत सहायक यंत्री बने विजय भतपहरी को 2003 में तदर्थ पदोन्नति देकर राजनांदगांव संभाग में कार्यपालन अभियंता बनाया गया।
इसी दौरान मानपुर–संबलपुर मार्ग (51 किमी) निर्माण में 6.95 करोड़ की स्वीकृति के खिलाफ लगभग 10 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) की 4 जुलाई 2006 की रिपोर्ट में 4.37 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि और तीन माह की पुस्तिकाओं के गुम होने को गंभीर अनियमितता बताया गया था।
कोरबा कलेक्टर के खिलाफ भी सरकार को घेर चुके हैं पूर्व गृह मंत्री
यह पहला मौका नहीं है जब ननकी राम कंवर ने अपनी ही सरकार के अफसरों और मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा खोला हो।
इससे पहले वे कोरबा कलेक्टर अजीत बसंत के खिलाफ भी खुली मुहिम चला चुके हैं। उस मामले में वे केवल चिट्ठी तक सीमित नहीं थे, बल्कि रायपुर तक धरना देने पहुंच गए थे। इससे सरकार और भाजपा संगठन भी असहज स्थिति में थी।
ननकी राम कंवर को टाटीबंध में एक मकान के पास ही हाउस अरेस्ट कर लिया गया था। उन्हें धरना देने से रोक दिया गया था। तब भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव ने हस्तक्षेप किया और उनसे मिलकर सरकार की तरफ कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
तब जाकर पूर्व गृह मंत्री मानें और वापस कोरबा लौट गए थे।
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