BANGLADESH INDIA : बांग्लादेश ने चटगांव के मीरसाराई इलाके में भारत के लिए आवंटित स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) की लगभग 850 एकड़ जमीन रद्द कर दी है। यह फैसला मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने जनवरी 2026 में लिया। मूल रूप से 2015 में पीएम मोदी और शेख हसीना के बीच हुए समझौते के तहत यह जमीन भारतीय निवेशकों के लिए इंडियन इकोनॉमिक जोन (IEZ) के रूप में दी गई थी लेकिन परियोजना में ज्यादा रुचि नहीं दिखी और फंड का सिर्फ 1% इस्तेमाल हुआ, जिसके बाद इसे G2G फ्रेमवर्क से हटा दिया गया।
अब इस जमीन पर डिफेंस इकोनॉमिक जोन या मिलिट्री इकोनॉमिक जोन बनाया जाएगा, ताकि बांग्लादेश अपनी रक्षा क्षमता मजबूत कर सके और स्थानीय हथियार उत्पादन बढ़ा सके। इस बीच बांग्लादेश ने चीन के साथ एक बड़ा रक्षा समझौता किया है। बांग्लादेश एयर फोर्स ने चीन की कंपनी CETC के साथ मिलकर ड्रोन (UAV) बनाने का प्लांट लगाने का करार किया है। यह प्लांट बॉग्रा एयरबेस के पास बनेगा और इसमें मीडियम रेंज तथा वर्टिकल लिफ्ट ड्रोन बनेंगे। चीन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी करेगा, जिससे बांग्लादेश खुद ड्रोन बना सके। यह प्लांट 2026 के अंत तक काम शुरू कर सकता है।
साथ ही, बांग्लादेश ने चीन से 20 J-10CE फाइटर जेट खरीदने की डील को आगे बढ़ाया है, जिसकी कीमत करीब 2.2 बिलियन डॉलर (लगभग 20 हजार करोड़ रुपये) है। डिलीवरी 2026-2027 में होगी और भुगतान 10 साल में किया जाएगा। यह बदलाव बांग्लादेश की रक्षा नीति में बड़ा शिफ्ट दिखाता है। Forces Goal 2030 के तहत देश अपनी वायुसेना और डिफेंस प्रोडक्शन को मजबूत करना चाहता है। पहले भारत के साथ आर्थिक सहयोग पर जोर था, लेकिन अब चीन के साथ रक्षा क्षेत्र में गहरा जुड़ाव बढ़ रहा है।
इससे दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है, खासकर भारत के उत्तर-पूर्वी इलाकों के नजदीक होने के कारण।विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश अब आत्मनिर्भरता पर फोकस कर रहा है, लेकिन यह फैसला भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है। दोनों देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दे लंबित हैं और यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा की नई चुनौतियां पैदा कर सकता है।











