नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय में विशेष कार्य अधिकारी या ओएसडी हिरेन जोशी (Hiren Joshi), 2019 से संयुक्त सचिव पद पर देश के सबसे शक्तिशाली कार्यालय में एक महत्वपूर्ण नाम हैं। बड़े मीडिया संस्थानों के प्रमुख पत्रकारों के व्हाट्सएप संदेश फीड में उनकी स्थायी उपस्थिति है, वो पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को किस तरह की कवरेज देनी चाहिए, यह भी तय करते हैं।
12 अक्टूबर के बाद उनकी ओर से कोई व्हाट्सएप संदेश नहीं आया। जिसके बाद कांग्रेस ने प्रेस कांफ्रेंस की और सोशल मीडिया पर यह मुद्दा छाया रहा। अब ताजा खबर है कि हीरेन व्हाट्सएप ग्रुप में नजर आने लगे हैं।
हीरेन के वापस लौटने की खबर के वायरल होते ही द प्रिंट ने अपनी हिंदी और अंग्रेजी की वेबसाइट से हीरेन से संबंधित खबर हटा दी।
कांग्रेस नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कल कुछ सवाल पूछे थे, जिनमें कहा गया कि जोशी ने ‘भारतीय लोकतंत्र का गला घोंटने’ में अहम भूमिका निभाई है और इसलिए लोगों को यह जानना जरूरी है कि ‘विधि आयोग में उनके सहयोगी को बेवजह अपना घर छोड़ने और खाली करने के लिए क्यों कहा गया’, और यह भी कि ‘उनके व्यावसायिक साझेदार कौन हैं? भारत को जानने का अधिकार है।’
खेड़ा ने जोशी के संभावित व्यावसायिक संबंधों और विदेश यात्राओं के बारे में बातचीत का जिक्र किया, जिनकी सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही थी।
इकोसिस्टम के मदरबोर्ड
न्यूज़लॉन्ड्री ने ओपन मैगजीन के हवाले से लिखा है कि ‘हिरेन जोशी सिर्फ मोदी के इकोसिस्टम का हिस्सा नहीं हैं – वे इस इकोसिस्टम के मदरबोर्ड हैं। मोदी के मुख्य व्यक्ति। वो शख्स जिसने सिर्फ प्रधानमंत्री को डिजिटल रणनीति पर सलाह ही नहीं दी, बल्कि नमो के पूरे ऑनलाइन जगत को नए सिरे से खड़ा किया।
2008 में, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी ने उन्हें एक कार्यक्रम में तकनीकी खराबी ठीक करने के लिए नियुक्त किया था। उसके बाद वो आगे बढ़ते गए।
नवनीत के इस्तीफे पर भी सवाल
वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल का प्रसार भारती के अध्यक्ष पद से अचानक इस्तीफा, जिसे उनके इस्तीफा देने के 24 घंटे के भीतर स्वीकार कर लिया गया, मोदी सरकार की अपारदर्शी संचार मशीनरी में एक और महत्वपूर्ण बदलाव है।
तीन साल के कार्यकाल के मात्र 20 महीने बाद सहगल के इस्तीफे से इस बात को लेकर अटकलें तेज हो गईं कि आखिर क्या हो रहा है और क्या उनका अचानक इस्तीफा किसी तरह से जोशी की ‘अनुपस्थिति’ से जुड़ा है।
अब तक किनका किनका इस्तीफा
द वायर लिखता है कि यह सर्वविदित है कि मोदी सरकार द्वारा नियुक्त कई लोगों ने, बिना किसी पूर्व सूचना के, प्रमुख पदों से अभूतपूर्व रूप से इस्तीफा दे दिया है, जैसे वित्त सचिव एस.सी. गर्ग, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर उर्जित पटेल, अशोक लवासा जैसे लोग चुनाव आयुक्त (भारत के पहले) के पद से, और उसके बाद एक अन्य चुनाव आयुक्त अरुण गोयल ने भी, वह भी आम चुनाव की अधिसूचना जारी होने से कुछ ही दिन पहले। लेकिन कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, और आमतौर पर ‘व्यक्तिगत कारणों’ का हवाला दिया गया।
क्या हीरेन का हुआ था धनखड़?
वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने हिरेन जोशी के बारे में पूछा है कि क्या उन्हें ‘धनखड़’ किया गया था। अन्य लोग यह अनुमान लगा रहे थे कि क्या संसद सत्र के दौरान मुख्य विपक्षी दल द्वारा इस मामले में दिखाई जा रही रुचि के कारण ही उन्हें चुपचाप वापस लाया गया है।
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