सुप्रीम कोर्ट BLO के साथ, राज्यों को दिए निर्देश, कहा – अतिरिक्त स्टाफ लगाओ, दबाव कम करो

नई दिल्ली। बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर Special Intensive Revision (SIR) के काम का इतना दबाव पड़ रहा था कि कई जगहों से आत्महत्या तक की खबरें आईं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्ती से हस्तक्षेप किया और BLO के हक में खड़ा हो गया। कोर्ट ने सभी राज्यों को साफ निर्देश दिए हैं कि SIR का काम पूरा करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारी लगाए जाएं, ताकि BLO के काम के घंटे कम हों और उन पर मानसिक दबाव न पड़े।

कोर्ट ने दिए तीन बड़े निर्देश

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा:
-राज्यों में अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया जाए, ताकि एक ही व्यक्ति पर दिन-रात काम का बोझ न पड़े।
-अगर कोई BLO स्वास्थ्य या निजी कारणों से छूट मांगता है, तो उसकी अर्जी को केस-टू-केस देखकर मंजूर किया जाए और तुरंत उसकी जगह किसी और को लगाया जाए।
-अगर राज्य सरकार कोई राहत नहीं दे पाती, तो BLO सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।

आत्महत्याओं का जिक्र आया तो कोर्ट सख्त हुआ

साउथ एक्टर विजय की पार्टी TVK के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट में बताया, ’35-40 BLO आत्महत्या कर चुके हैं। ज्यादातर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और शिक्षक हैं। उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है कि काम पूरा नहीं किया तो 2 साल की जेल होगी। उत्तर प्रदेश में 50 FIR दर्ज हो चुकी हैं। तमिलनाडु में एक लड़के की शादी थी छुट्टी नहीं मिली तो उसने जान दे दी।’

CJI ने इन बातों को गंभीरता से सुना और कहा, ‘ये कानूनी ड्यूटी है, लेकिन इंसानियत भी जरूरी है। राज्य सरकारें कर्मचारी देती हैं, इसलिए वो ही जिम्मेदारी लें।’

SIR क्या है और डेडलाइन अब कब तक?

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मतदाता सूची को साफ-सुथरा करने का बड़ा अभियान है। BLO घर-घर जाकर फॉर्म भरवाते हैं। पहले डेडलाइन 4 दिसंबर थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के कहने पर चुनाव आयोग ने 7 दिन बढ़ाकर 11 दिसंबर कर दी। अब ड्राफ्ट लिस्ट 16 दिसंबर को आएगी और फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।

99.53% फॉर्म पहुंचे, 79% डिजिटल हो चुके

चुनाव आयोग ने बताया कि 51 करोड़ मतदाताओं के लिए बनाए गए फॉर्म में से 99.53% लोगों तक पहुंच गए हैं और 79% फॉर्म का डाटा ऑनलाइन अपलोड हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया – चुनाव का काम जरूरी है, लेकिन किसी की जान से ज्यादा कीमती कुछ नहीं। अब सभी राज्य सरकारों पर नजर है कि वे कितनी जल्दी अतिरिक्त स्टाफ लगाती हैं और BLO का दबाव कम करती हैं।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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