मणिपुर हिंसा के दो साल, राहत शिविरों में जारी है जिंदगी की जंग

Two years of Manipur violence

मणिपुर की धरती, जो कभी अपनी खूबसूरती और संस्कृति की मिसाल थी, दो साल से हिंसा (Two years of Manipur violence) की आग में जल रही है। 3 मई 2023 को शुरू हुआ यह तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा। 70 हजार से ज्यादा लोग अपने ही घरों से बेदखल होकर राहत शिविरों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। ये शिविर, जो उम्मीद का ठिकाना बनने चाहिए थे, वहां भोजन, शौचालय जैसी बुनियादी जरूरतें भी मयस्सर नहीं। पीपुल्स क्रॉनिकल ने अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया है 26,000 से ज्यादा लोग हर दिन अभावों से जूझ रहे हैं। ड्रोन और भारी हथियारों की गूंज ने लोगों के दिलों में खौफ भर दिया है। शांति अब भी एक अधूरी ख्वाहिश है।

हिंदू मैतेई और आदिवासी (ईसाई) कुकी समुदायों के बीच भूमि, आरक्षण और सांस्कृतिक पहचान को लेकर गहराया विवाद हिंसा का मुख्य कारण रहा। हिंसा में 270 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, 1500 से ज्यादा घायल हुए हैं।

मणिपुर हिंसा की शुरुआत दो साल पहले चुरचांदपुर जिले के तोरबंग इलाके में हुई, जब कुकी समुदाय ने ‘आदिवासी एकता मार्च’ निकाला। यह मार्च मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में था। मणिपुर हाई कोर्ट ने 19 अप्रैल 2023 को मैतेई समुदाय को एसटी दर्जा देने की सिफारिश करने का आदेश दिया था, जिसे कुकी और अन्य जनजातीय समुदायों ने अपने हितों पर हमला माना।

क्‍या है मैतेई-कुकी विवाद

मैतेई, जो राज्य की 53% आबादी हैं, मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं और हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध व सनमाही धर्म का पालन करते हैं। दूसरी ओर कुकी और नगा, जो 40% आबादी हैं, पहाड़ी क्षेत्रों में रहते हैं और ज्यादातर ईसाई हैं। मणिपुर का 90% भूभाग पहाड़ी है, जहां गैर-जनजातीय मैतेई जमीन नहीं खरीद सकते, जबकि कुकी घाटी में बस सकते हैं। मैतेई का कहना है कि यह नियम उनके साथ भेदभाव करता है, जबकि कुकी का आरोप है कि मैतेई को एसटी दर्जा मिलने से उनकी नौकरियां और संसाधन खतरे में पड़ जाएंगे।

इसके अलावा म्यांमार से कुकी समुदाय के प्रवासियों की घुसपैठ, नशीली दवाओं के खिलाफ सरकार की कार्रवाई और अवैध हथियारों की उपलब्धता ने भी हिंसा को भड़काया।

जातीय हिंसा के दो साल बाद व्‍यापक बंद

जातीय हिंसा के दो वर्ष पूरे होने पर राज्यभर में व्यापक बंद और विरोध प्रदर्शन का साफ असर दिखाई दिखाई दिया। राजधानी इंफाल में सभी स्कूल-कॉलेज, सरकारी और निजी संस्थान बंद रहे। सड़कों से सार्वजनिक परिवहन नदारद रहा और दुकानें व अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान भी पूरी तरह बंद दिखे। घाटी क्षेत्र में यह बंद मणिपुर अखंडता समन्वय समिति (सीओसीओएमआई) द्वारा बुलाया गया था, जबकि पहाड़ी इलाकों में ज़ोमी छात्र संघ (जेडएसएफ) और कुकी छात्र संगठन (केएसओ) ने बंद का नेतृत्व किया।

इम्फाल के खुमान लम्पक स्टेडियम में सीओसीओएमआई द्वारा आयोजित ‘मणिपुर पीपुल्स कन्वेंशन’ में हज़ारों लोग जुटे। सम्मेलन में वक्ताओं ने केंद्र सरकार से राज्य के सभी समुदायों के लोगों को “स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही” की गारंटी देने की मांग की। कार्यक्रम में पारित एक प्रस्ताव में केंद्र पर शांति बहाली और जिम्मेदारियों के निर्वहन में विफल रहने का आरोप लगाया गया।

अलग प्रशासन की मांग

कुकी समुदाय, खासकर चुरचांदपुर जैसे क्षेत्रों में अलग प्रशासन की मांग कर रहा है। उनका मानना है कि मैतेई-प्रधान सरकार उनके हितों की अनदेखी करती है। कुकी संगठनों का कहना है कि जब तक उन्हें अलग प्रशासनिक इकाई नहीं मिलती तब तक शांति संभव नहीं है। दूसरी ओर मैतेई समुदाय एकीकृत मणिपुर की वकालत करता है और सेपरेशन को राज्य की अखंडता के खिलाफ मानता है।

मुख्यमंत्री का इस्तीफा

भारी दबाव और बिगड़ते हालात के बीच 9 फरवरी 2025 को मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। विपक्ष और कई संगठनों ने लंबे समय से उनके इस्तीफे की मांग की थी, क्योंकि वह मैतेई समुदाय से हैं और उन पर पक्षपात के आरोप लगते रहे। इस्तीफे से पहले उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने शांति के लिए हर संभव कोशिश की। हालांकि, इस्तीफे के बाद नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति और शांति प्रक्रिया पर अनिश्चितता बनी हुई है।

अब मणिपुर नहीं गए प्रधानमंत्री मोदी

मणिपुर में पिछले दो वर्षों से जारी जातीय हिंसा ने राज्य को अस्थिरता के भंवर में डाल रखा है। विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मणिपुर का दौरा न करने को लेकर तीखी आलोचना की है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा था कि सैकड़ों लोग मर चुके हैं, हजारों लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं और फिर भी प्रधानमंत्री ने मणिपुर का दौरा नहीं किया है।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति शासन लागू होने के बावजूद मणिपुर में हालात सामान्य नहीं हुए हैं और केंद्र सरकार कोई सार्थक समाधान तलाशने के बजाय “राजनीतिक खेल” खेल रही है। मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता ओकराम इबोबी सिंह ने कहा था कि मणिपुर में हिंसा का स्थायी समाधान केवल संवैधानिक मूल्यों की रक्षा से ही संभव है।

गृह मंत्री, अमित शाह ने मई 2023 में मणिपुर का दौरा किया और दोनों समुदायों से शांति की अपील की। उन्होंने 2023 में संसद में कहा कि म्यांमार से कुकी प्रवास और हाई कोर्ट के आदेश ने हिंसा को बढ़ावा दिया। उन्होंने बीरेन सिंह का बचाव भी किया। राहुल गांधी ने मणिपुर का दौरा कर चुके हैं। 2023 में उन्‍होंने लोकसभा में कहा कि “मणिपुर में भारत मां की हत्या हुई।”

जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “मानवीय और संवैधानिक संकट”

अगस्त 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा को “मानवीय और संवैधानिक संकट” करार देते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। कोर्ट ने इसे “संवैधानिक तंत्र का पूर्ण पतन” बताया और केंद्र व राज्य सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाए।

19 जुलाई 2023 को दो कुकी महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न का वीडियो वायरल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया। कोर्ट ने सरकार को तत्काल कार्रवाई की चेतावनी दी और कहा कि यदि सरकार कदम नहीं उठाएगी, तो वह खुद हस्तक्षेप करेगी। इस मामले में सीबीआई को जांच सौंपी गई, लेकिन दिसंबर 2024 तक केवल 6% मामलों में चार्जशीट दाखिल हुई।

7 अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा प्रभावित लोगों के लिए राहत और पुनर्वास की निगरानी के लिए एक समिति गठित की। कोर्ट ने विस्थापित लोगों की संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया, लेकिन मई 2024 में इस आदेश के पालन में विफलता पर दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि कानून के अनुसार काम करेगा।

नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा में मारे गए लोगों के शवों के अंतिम संस्कार का आदेश दिया, जिनकी पहचान हो चुकी थी। कोर्ट ने कहा कि शवों को शवगृह में रखना अमानवीय है और एक सप्ताह में अंतिम संस्कार सुनिश्चित किया जाए।

फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऑडियो क्लिप की फोरेंसिक जांच के आदेश दिए, जिसमें कथित तौर पर मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह मैतेई समुदाय को हिंसा के लिए उकसाते और प्रशासन को पक्षपातपूर्ण निर्देश देते सुने गए। इस जांच से हिंसा में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को बल मिला है।

मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट के छह जजों का प्रतिनिधिमंडल मणिपुर का दौरा करने वाला था, लेकिन चुरचांदपुर बार एसोसिएशन ने मैतेई समुदाय के जजों के प्रवेश का विरोध किया। इससे कोर्ट ने दोनों समुदायों के बीच गहरे अविश्वास पर चिंता जताई। जनवरी 2025 में एक याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मणिपुर हिंसा से संबंधित मामलों की सुनवाई में देरी और केवल छह सुनवाइयां होने से न्याय प्रक्रिया प्रभावित हुई है। कोर्ट ने एक समर्पित पीठ गठित करने का प्रस्ताव दिया।

संसद में मणिपुर पर चर्चा

2023 में मणिपुर हिंसा पर संसद में जमकर हंगामा हुआ। राहुल गांधी ने केंद्र पर मणिपुर को जलाने का आरोप लगाया, जबकि स्मृति ईरानी ने जवाब दिया कि मणिपुर भारत का अभिन्न हिस्सा है। अमित शाह ने हिंसा के लिए म्यांमार प्रवास और हाई कोर्ट के आदेश को जिम्मेदार ठहराया। 2024 में लोकसभा में विपक्ष ने हिंसा को लेकर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने जिरीबाम हिंसा पर चिंता जताई। सुप्रीम कोर्ट ने भी मणिपुर में सोशल मीडिया पर अफवाहों को लेकर चेतावनी दी।

Two years of Manipur violence : टाइमलाइन

2728 अप्रैल 2023: चुरचांदपुर में पूर्व मुख्‍यमंत्री बीरेन सिंह के दौरे के खिलाफ बंद। भीड़ ने ओपन जिम में आग लगाई, धारा 144 लागू, इंटरनेट बंद।

3 मई 2023: कुकी समुदाय का ‘आदिवासी एकता मार्च’, मैतेई-कुकी झड़प, चुराचांदपुर के तोरबंग इलाके में हिंसा हिंसा भड़की।

4 मई 2023: दो कुकी महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न की घटना, जिसका वीडियो जुलाई में वायरल हुआ।

14 मई 2023: तोरबंग में ताजा हिंसा, घर और ट्रक जलाए गए। बीरेन सिंह ने दिल्ली में शाह से मुलाकात की।

19 जुलाई 2023: यौन उत्पीड़न का वीडियो वायरल, देशभर में आक्रोश।

सितंबर 2023: छात्रों की मौत के बाद इंफाल में हिंसक प्रदर्शन।

18-21 अक्टूबर 2024: जिरीबाम में स्कूल और घर जलाए गए, हिंसा बढ़ी।

11 नवंबर 2024: जिरीबाम में मुठभेड़, 10 की मौत, हिंसा पूरे मणिपुर में फैली।

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