अम्बानी, अडानी के चैनलों समेत 21 मीडिया हाउसेज ने मोदी के प्राइवेसी लॉ को कोर्ट में दी चुनौती

नई दिल्ली। अरबपतियों मुकेश अंबानी और गौतम अदाणी के स्वामित्व वाली कंपनियों सहित 21 मीडिया (Media) हाउसेज के एक समूह ने भारत के प्राइवेसी कानून को अदालत में चुनौती दी है। उनका तर्क है कि यह कानून खोजी पत्रकारिता को नुकसान पहुंचाएगा और सरकार को पत्रकारों के स्रोतों की पहचान करने का मौका देगा। दस्तावेजों से यह जानकारी मिली है।महत्वपूर्ण है कि इस कानून से पत्रकारों को सरकार किसी भी खबर का सोर्स प्रस्तुत करने को मजबूर कर सकती है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले साल यूजर्स के डिजिटल पर्सनल डेटा की सुरक्षा के लिए प्राइवेसी कानून लागू करने की घोषणा की थी। इससे मेटा और गूगल जैसे प्लेटफॉर्म पर अनुपालन की शर्तें सख्त हुईं। प्रकाशकों का कहना है कि चूंकि मीडिया संस्थानों को इससे छूट नहीं दी गई, इसलिए यह कानून प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है।
6 अक्टूबर को दायर यह मुकदमा पहली बार रिपोर्ट किया जा रहा है और मंगलवार को इसकी सुनवाई होनी है। यह मोदी के प्राइवेसी कानून के खिलाफ अब तक का सबसे हाई-प्रोफाइल चुनौती है। इससे पहले केवल फ्री स्पीच एक्टिविस्ट और छोटे समाचार संस्थानों के एक समूह ने ही इसे चुनौती दी थी।
यह अंबानी और अदाणी के नेतृत्व वाले व्यवसायों की ओर से सरकार के खिलाफ एक असामान्य चुनौती भी है। विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि ये व्यवसायी मोदी के करीब हैं और उन्हें अनुकूल व्यवहार मिलता है l

याचिकाकर्ता तर्क दे रहे हैं कि कानून किसी पत्रकार को जिस व्यक्ति की जांच करनी है, उससे पहले सहमति लेने के लिए मजबूर कर सकता है और प्रकाशकों को खबरें हटाने पर मजबूर कर सकता है। वे यह भी कहते हैं कि कानून के तहत जानकारी मांगने की शक्तियां रिपोर्टरों के स्रोतों को उजागर कर सकती हैं।698 पेज की याचिका में कहा गया है कि कानून “खोजी पत्रकारिता को घटनाओं का एक हानिरहित और कमजोर रिकॉर्डर बना देगा।”

मीडिया कंपनियों को अगस्त की बैठक में सरकार से आश्वासन मिला था कि कानून प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करेगा, लेकिन यूरोपीय संघ, सिंगापुर और ब्रिटेन की तरह पत्रकारों के लिए लिखित छूट न होना चिंताजनक था। भारत के डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर गोपनीय याचिका में यह कहा, जिसे रॉयटर्स ने देखा।

सहमति को लेकर चिंताएं

DNPA के सदस्यों में अंबानी का नेटवर्क18, अदाणी का NDTV और अन्य प्रमुख मीडिया समूह शामिल हैं, जैसे इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स इंटरनेट जो टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप का हिस्सा है और भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली अंग्रेजी दैनिक अखबार का प्रकाशक है

कानून में सहमति की आवश्यकता एक प्रमुख चिंता है, जैसा कि समूह की याचिका में कहा गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या ऑनलाइन रिटेलर यूजर्स के साइन-अप के समय सहमति मांग सकते हैं, लेकिन DNPA का तर्क है कि किसी पत्रकार को जांच के विषय को सूचित करने और सहमति मांगने की आवश्यकता उस विषय के सबूत नष्ट करने और गवाहों को धमकाने का मौका देगी।
कानून लोगों को किसी भी समय सहमति वापस लेने और अपने डेटा को मिटाने की अनुमति भी देता है, बिना किसी जनहित सुरक्षा के। DNPA का कहना है कि इससे उसके सदस्यों को तथ्यात्मक समाचार रिपोर्ट को अप्रकाशित करना या भारी रूप से संपादित करना पड़ सकता है।

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