लेंस डेस्क। दिल्ली में आगामी 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली को लेकर राजनीतिक और व्यापारिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दो टूक कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटा दें, तो वे महज 30 सेकंड के भीतर इस आंदोलन और रैली को रोक देंगे। राहुल ने व्यापारियों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि वे उनकी हर बात सुन रहे हैं, लेकिन रैली टालने से फिलहाल इनकार कर दिया है।
दूसरी ओर, दिल्ली के व्यापारी संगठन इस महारैली के विरोध में उतर आए हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने चेतावनी दी है कि दिवाली के पीक सीजन में इस तरह के बड़े आयोजन से दिल्ली के थोक बाजारों को करीब 10 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम व्यापारिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि रामलीला मैदान की क्षमता करीब 50 हजार लोगों की है, जबकि इस रैली में 10 लाख लोगों के जुटने का अनुमान है, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।
व्यापारी संगठनों के अनुसार, रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, नया बाजार, चावड़ी बाजार, दरियागंज और कश्मीरी गेट जैसे 20 से ज्यादा प्रमुख थोक बाजार इस रैली से सीधे प्रभावित होंगे। भारी बैरिकेडिंग और सड़कों के बंद होने की वजह से दिल्ली के बाहर से रोजाना आने वाले 3 से 4 लाख खरीदार इन बाजारों तक नहीं पहुंच पाएंगे। गौरतलब है कि पिछले साल 2025 में अकेले दिवाली सीजन के दौरान इन केंद्रीय बाजारों में लगभग 75,000 करोड़ रुपये की बंपर बिक्री दर्ज की गई थी।
विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक के तमाम नेता मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनाव से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी देशवासियों से संविधान और लोकतंत्र बचाने के नाम पर इस महारैली में भारी संख्या में शामिल होने की अपील की है। इससे पहले भी विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों द्वारा अक्टूबर महीने में कई बार प्रदर्शन किए जा चुके हैं, जिसके चलते पुलिस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियां भी तेज हो गई हैं।










