रायपुर। छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस (Youth Congress) के संगठनात्मक चुनाव में ऑनलाइन वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। चुनाव के दौरान प्रदेशभर में 14 लाख 56 हजार 626 वोट दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, सदस्यता शुल्क के तौर पर अब तक करीब 10 करोड़ 6 लाख रुपये का भुगतान होने का आंकड़ा सामने आया है।

चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इसकी पारदर्शिता को लेकर विवाद शुरू हो गया है। कई प्रत्याशियों और समर्थकों ने फर्जी वोटिंग, फर्जी आईडी, OTP और वर्चुअल नंबर के इस्तेमाल के साथ With IYC ऐप में तकनीकी गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं।
एक लाख 15 हजार सदस्यों का पेमेंट नहीं
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक युवा कांग्रेस चुनाव में कुल 14 लाख 56 हजार 626 वोट पड़े। इनमें 13 लाख 41 हजार 526 वोट ऐसे हैं, जिनके लिए 75 रुपए सदस्यता शुल्क का भुगतान किया गया है।
इस हिसाब से छत्तीसगढ़ में मेंबरशिप का करीब 10 करोड़ 06 लाख रुपए का भुगतान हो चुका है।
वहीं, करीब 1 लाख 15 हजार वोट ऐसे हैं, जिनका 75 रुपए सदस्यता शुल्क का भुगतान नहीं हुआ है। इन वोटों के हिसाब से लंबित राशि करीब 86.32 लाख रुपए है। भुगतान के बाद ही ये वोट अप्रूव होंगे।
मतदान खत्म होते ही फर्जी वोटिंग के आरोप
29 सितंबर को ऑनलाइन मतदान प्रक्रिया खत्म होने के बाद चुनाव को लेकर शिकायतों का सिलसिला शुरू हुआ। भिलाई में प्रदेश अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अर्जुन शर्मा ने खुर्सीपार थाने में शिकायत देकर सरकारी ITI में फर्जी पहचान के जरिए ऑनलाइन वोटिंग कराने का आरोप लगाया।
शिकायत से जुड़े वीडियो के आधार पर भी ऑनलाइन वोटिंग कराए जाने के दावे सामने आए हैं।
शिकायतों में वर्चुअल नंबर और OTP के जरिए फर्जी ID बनाने तथा कुछ मामलों में फोटो के आधार पर AI तकनीक से वीडियो तैयार कर चुनावी ऐप पर इस्तेमाल किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की जांच और आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
With IYC ऐप पर भी सवाल
विवाद सिर्फ फर्जी वोटिंग के आरोपों तक सीमित नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष पद के प्रत्याशी विनय शील ने With IYC ऐप में तकनीकी गड़बड़ी या किसी तरह के हस्तक्षेप की जांच की मांग की है।
उनकी ओर से दावा किया गया कि उनके ऐप अकाउंट में ऐसे सात अनपेड वोट दिखाई दिए, जिन्हें उन्होंने खुद दर्ज नहीं कराया था। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में इस्तेमाल हुए ऐप की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
जशपुर से भी ऐप में अतिरिक्त वोट दिखाई देने को लेकर शिकायत सामने आई है। संबंधित पक्षों ने IP एड्रेस, नेटवर्क और तकनीकी गतिविधियों की जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मामला तकनीकी गड़बड़ी का था या किसी स्तर पर हस्तक्षेप हुआ।










