प्रचार में खूब गाया सुजलाम सुफलाम मलयज शीतलाम…चुनाव जीता और राष्ट्रगीत ही भूल गई भाजपा!

बंगाल चुनाव से पहले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय रचित वंदे मातरम को अपनी राजनीतिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल करने वाली भारतीय जनता पार्टी BJP को चुनाव जीतते ही ना राष्ट्रगीत वंदे मातरम की याद आई ना बंकिम चंद्र याद रहे, और तो और रविंद्र संगीत को भी भुला दिया…यह भी बंगाल में पहली बार हुआ।बंगाल में ही नहीं बिहार और उत्तर प्रदेश में भी भाजपा वंदे मातरम को भूल गई!

दूसरी ओर तमिलनाडु में नए प्रोटोकॉल के तहत पूरे छह छंदों वाले राष्ट्रगीत वंदे मातरम का गान हुआ…उस तमिलनाडु में जिसके नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने अपने पहले भाषण में कहा – यह तमिलनाडु में सच्ची धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के नए युग की शुरुआत है।

पूरी रिपोर्ट देखें इस वीडियो में

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के ही प्रोटोकॉल के तहत — आधिकारिक समारोहों, शपथ ग्रहण सहित कई मौकों पर पूर्ण वंदे मातरम का गान अनिवार्य है और इसे राष्ट्रगान से पहले बजाया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि इसी साल MHA के फरवरी 2026 दिशा-निर्देशों के अनुसार, आधिकारिक शपथ ग्रहण, राष्ट्रपति/राज्यपाल समारोहों और सरकारी कार्यक्रमों में पूर्ण वंदे मातरम (3 मिनट 10 सेकंड) अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान से पहले बजाया जाना चाहिए… BJP ने बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले वंदे मातरम को भारी प्रचार दिया था। दिसंबर 2025 में संसद के शीतकालीन सत्र में विशेष चर्चा बुलाई गई, जिसकी शुरुआत खुद प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में की और अमित शाह ने राज्यसभा में। BJP ने इसे राष्ट्रवाद और संस्कृति का बड़ा मुद्दा बनाया था। लेकिन सत्ता मिलने के बाद BJP शासित राज्यों (बंगाल, बिहार) में ही इसे चुपचाप नजरअंदाज कर दिया जा रहा है।

क्या आपको नहीं लगता कि यह राष्ट्रवाद नहीं, बल्कि साफ राजनीतिक सुविधा का खेल है? जब सत्ता की जरूरत पड़ी तो संस्कृति का ढोल पीटा, जब सत्ता हाथ लगी तो राष्ट्र गीत को लेकर प्रोटोकॉल ही भूल गए…

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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