योगी मॉडल के समर्थक भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर क्यों हुआ?

Bharat Bhushan Tiwari

बिहार में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पुलिस और अपराधियों के बीच 13 से अधिक एनकाउंटर (मुठभेड़) होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि भरत भूषण तिवारी (Bharat Bhushan Tiwari) के ताजा एनकाउंटर के बाद पुलिस और सरकार सवालों के घेरे में है। उन पर चौतरफा राजनीतिक एवं सामाजिक दबाव पड़ रहा है।

आसान भाषा में पूरा मामला समझिए

कुछ दिन पहले बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में आने वाले बिलौटी गांव के भरत भूषण ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में सरकारी कामकाज के तरीके पर नाराजगी जताई थी और एक अधिकारी का ‘एनकाउंटर’ करने की बात कही थी। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस उनके घर गई। पुलिस के मुताबिक उन्होंने भरत भूषण को समझाने की कोशिश भी कि लेकिन भरत ने पिस्टल निकाल ली। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुआ। 

फिर 16 जून को पुलिस की एक प्रेस रिलीज में कहा गया कि विभाग के अफसर जब भरत भूषण के घर गए, तो पता चला कि वह मानसिक रूप से बीमार हैं। उन्हें अस्पताल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस ने जनता से भी अपील की कि वह भरत के वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करने से बचे।‌ उसी दिन भरत ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उन्हें खत्म करने की कोशिश की जा रही है। वह समाज और देश की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ पुलिस की स्पेशल टीमें लगाई जा सकती हैं। 

स्थानीय पत्रकार आलोक के अनुसार भरत तीन दिन तक पुलिस को चुनौती देता रहा। उसने फेसबुक लाइव किया और पुलिस पर गोली चलाई। भरत की मांग थी कि नेता और अधिकारी जो वादे जनता से करते हैं, उन्हें पूरा करें। वह पिछले साल बाढ़ के दौरान हुए कटाव का मामला उठाकर सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहा था और इसे ना किए जाने से नाराज था। भरत इलाके में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय था और आम लोगों की परेशानी प्रशासन के पास लेकर जाता था।

फिर बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को लगभग 30 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। भोजपुर पुलिस के एसपी कार्यालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भरत भूषण पिस्तौल लहराते हुए हवाई फायरिंग कर रहा था। पुलिस और एसटीएफ़ लगातार उसे समर्पण के लिए कह रहे थे, पर वह रुक-रुककर फायरिंग करता रहा और उसने लोगों के साथ पुलिस की सुरक्षा खतरे में डाल दी। एसटीएफ़ जवानों ने बुलेट प्रूफ जैकेट पहनकर क्लोज कॉर्डनिंग कर उसे काबू में लेने की कोशिश की, लेकिन भरत ने गोलीबारी जारी रखी। सुरक्षा के लिए पुलिस को आत्मरक्षार्थ गोली चलानी पड़ी।

वहीं भरत के परिवार वाले और गांव वाले पुलिस पर एनकाउंटर करने का आरोप लगाते हैं। भरत भूषण के पिता कासीनाथ तिवारी ने मीडिया से कहा, ‘सुबह से मुझे थाने में बिठाए रखा गया और मेरे बेटे को गांव में गोली मार दी गई। मेरा बेटा अपराधी नहीं था, बस उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं था। शाम को मुझे थाने से छोड़ा गया। पुलिस ने पहले से ही मेरे बेटे को मारने की योजना बनाई थी।‘

स्थानीय लोगों के मुताबिक और सोशल मीडिया पर भरत के एनकाउंटर की अलग-अलग कहानी बताई जा रही है। एक वायरल वीडियो के मुताबिक भरत तिवारी का पहले पुलिस से झगड़ा हुआ, उसके बाद उन्होंने ये कदम उठाया, फिर पुलिस उनका एनकाउंटर कर दी।

जहां एक तरफ बिहार के कई शहरों में मोमबत्ती जलाकर और मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से लोग इसे फर्जी एनकाउंटर बताकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं पुलिस इसे जरूरी कार्रवाई कह रही है।‌

पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

एनकाउंटर से पहले भरत ने एक बार लाइव किया था। वीडियो में एक तरफ पुलिस खड़ी और दूसरी तरफ भरत मैदान में बोलते दिखे। लाइव में वह पुलिस की ओर पिस्तौल फेंकते हुए भी दिखते हैं, फिर वीडियो वहीं खत्म हो गया। वहीं पुलिस का दावा है कि भरत पर सिर्फ दो गोलियां चलाई गईं, लेकिन परिवार का कहना है कि भरत को चार से पांच गोलियां मारी गई।

पुलिस विभाग के एक कार्यक्रम में सम्राट चौधरी ने कहा था कि बिहार में कानून से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता। जो कोई भी पुलिस को चैलेंज करेगा, उसे 48 घंटे में जवाब मिलेगा। वहीं विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने कहा था कि राज्य में जाति को देखकर एनकाउंटर किए जा रहे हैं। 

23 मई को जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने प्रेस कॉफ्रेंस करके कहा था कि 20 नवंबर, 2025 से अब तक राज्य में 22 पुलिस एनकांउटर हुए जिसमें छह अपराधी मारे गए है। जब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहे उन्होंने कभी खुलकर इस नीति का समर्थन नहीं किया। इस घटना के बाद उनका पुराना वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे अपराधियों के एनकाउंटर किए जाने पर सवाल उठाते हुए दिख रहे हैं। 17 अप्रैल, 2023 को नीतीश कुमार ने मीडिया से कहा था कि अपराधियों का सफा माने मार दीजिए, यह कोई तरीका है? इसका मतलब जो जेल में जाएगा तो उसको मार दीजिए। ऐसा कोई नियम है?

जन सुराज के नेता मनीष कश्यप कहते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। थानाध्यक्ष का निलंबन भी कई सवालों को जन्म देता है। वहीं स्थानीय लोगों के मुताबिक पुलिस और भरत तिवारी के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण थे और दोनों के बीच कई बार विवाद होते रहे है।

एनकाउंटर मॉडल के समर्थक का एनकाउंटर

फ़र्ज़ी एनकाउंटर में मारे जा चुके शाहाबाद के भरत भूषण तिवारी योगी के ‘ठोको मॉडल’ के समर्थक थे। उसका वीडियो शेयर करते। आज खुद फर्जी एनकाउंटर के शिकार हो गए। सवाल यह है कि अगर भारत बच जाते तो क्या इस बात से सहमत होते कि एनकाउंटर अपराध नियंत्रण का अच्छा तरीका नहीं है?
सोशल मीडिया पर सैकड़ों पोस्ट देखने और कई लोगों से बात करने के बाद पता चल रहा है कि लोग एनकाउंटर पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। लोग इस एनकाउंट पर दुख और नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

यह बिहार है, उत्तर प्रदेश नहीं 

रोहतास जिला के रहने वाले प्रिंस सिंह राजपूत पॉकेट एफएम में सीनियर लेखक के तौर पर काम करते हैं। वह कहते हैं कि, ’यहां बहस पुलिस व्यवस्था पर होनी चाहिए। अफसोस यहां मृतक को भगत सिंह बनाने की कोशिश हो रही है। हम नायक की तलाश में इतने आतुर रहते हैं कि जिसे दो दिन पहले विक्षिप्त कहते हैं, उसके न रहने पर उसे महान साबित करने में जुट जाते हैं। वहीं कुछ नेताओं द्वारा इसे ब्रह्म हत्या बताया जा रहा है। जबकि इस देश के कानून में ब्राह्मण की हत्या और दलित की हत्या में एक जैसी सजा का प्रावधान है।‘ गौरतलब है कि वरिष्ठ भाजपा नेता अश्विनी चौबे ने भरत भूषण तिवारी की मौत को सुनियोजित हत्या और ‘ब्रह्म हत्या’ बताया है।

जनसुराज्य पार्टी से जुड़े तारिक अनवर चंपारणी समसामयिक मुद्दे पर लिखते रहते है। वह कहते हैं कि, ‘कानून और संविधान का खुला उल्लंघन और मजाक बनाया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक बात याद रखनी चाहिए। यह बिहार है, उत्तर प्रदेश नहीं है। यहां बुलडोजर और एनकाउंटर वाली सरकार नहीं चलेगी। अगर पगड़ी बचानी है, तो बिहार की सामाजिक तासीर को समझकर काम कीजिए, वरना जिन लोगों ने तख्त पर बिठाया है, वही लोग तख़्त उछालने में देरी नहीं करेंगे।‘

कबीरपंथी और बहुजन विचारधारा से जुड़े सृजन सन्नी कहते हैं कि, ‘भरत अपने क्षेत्र के लोगों के लिए वाकई हीरो था। लेकिन सवाल यह है कि भरत मुस्लिम या यादव होता, तो क्या आंदोलन इतनी ही तेज होता? अगर दलित समाज का होता, तो ये सवाल पूछने की जरूरत ही नहीं पड़ती, क्योंकि इस घटना का न आपको पता चलता और न हमको।‘

स्थानीय लोगों के लिए भरत क्यों था- नायक

वैसे तो बिहार का हर मुद्दा जाति से जुड़ जाता है। अपनी जाति के क्रिमिनल को हीरो बनाने की पुरानी प्रथा है बिहार की। हालांकि भरत भूषण तिवारी के भोजपुर के बिलौटी गांव में इस बार की कहानी कुछ अलग है। भरत भूषण तिवारी के समर्थन में सभी जाति और वर्ग के लोग हैं।

भरत तिवारी काफी समय से अपने इलाके के सामाजिक मुद्दों पर सोशल मीडिया पर बात करते थे। जवनियां गांव में बाढ़ पीड़ितों को बसाने में भ्रष्टाचार का मुद्दा उन्होंने हाल ही में जोर-शोर से उठाया था।

इस पूरे मामले में पुलिस ने एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग केस दर्ज किए हैं। इनमें मृतक भरत तिवारी, उसके पिता और भाई को भी नामजद किया गया है। वहीं एनकाउंटर के विरोध में सड़क जाम करने वाले लोगों पर भी मामला दर्ज किया गया है। 

वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज के द्वारा मामले की जांच कराने का निर्देश दिया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेन्द्र मिश्रा ने CJI को पत्र लिखा है। दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR, मामले की स्वतंत्र जांच, पीड़ित परिवार और गवाहों को सुरक्षा दिए जाने की मांग की गई है। 

आम आदमी के अलावा विपक्षी दलों और सरकार में शामिल नेता भी भरत तिवारी के समर्थन में बयान दे रहे हैं। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम भरत तिवारी के परिवार वालों से मिले। वहीं राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि भरत तिवारी को एक फर्जी एनकाउंटर में मारा गया। पहले भी जाति देखकर कई फेक एनकाउंटर किए गए हैं।

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