बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा क्यों दिया?

नई दिल्ली। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने सोमवार को अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान को लेकर वो नाराज थे जिनके बारे में उन्होंने कहा कि ये जाति आधारित असंतोष को बढ़ावा दे सकते है।

यूपी सरकार ने उनका इस्तीफा न स्वीकारते हुए उन्हें निलंबित कर शामली स्थित जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध कर जांच बैठा दी है।

यूजीसी नियमों से नाखुश अग्निहोत्री

अलंकार अग्निहोत्री ने नए UGC नियमों को काला कानून करार दिया और आरोप लगाया कि ये कॉलेजों में शैक्षणिक माहौल को खराब कर रहे हैं तथा इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि ये नए नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए लाए गए हैं। इनमें संस्थानों से विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी टीमें बनाने को कहा गया है, ताकि खासकर दलित और पिछड़े छात्रों की शिकायतों का निपटारा हो सके।

राज्यपाल को भेजा इस्तीफा

अग्निहोत्री, जो 2019 बैच के PCS अधिकारी हैं, ने अपना इस्तीफा ईमेल के जरिए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को भेजा।उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि जब सरकारें ऐसी नीतियां अपनाती हैं जो समाज और राष्ट्र को बांटती हैं, तो उन्हें जगाने की जरूरत पड़ती है।

गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में हुए थे शामिल

13 जनवरी को अधिसूचित यूजीसी के नए नियम प्रोमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 को सामान्य वर्ग के छात्रों की ओर से व्यापक आलोचना मिल रही है। उनका कहना है कि यह ढांचा उनके साथ भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है।

गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि नए UGC नियम ब्राह्मणों के खिलाफ अत्याचार को बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा कि ये प्रावधान भेदभावपूर्ण हैं और सामाजिक अशांति तथा आंतरिक असंतोष पैदा कर सकते हैं।


लोकतंत्र खत्म होने की दी दुहाई

अग्निहोत्री ने हाल की कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया, जिसमें प्रयागराज के माघ मेला में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को त्रिवेणी संगम पर स्नान करने से रोके जाने की घटना शामिल है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए।

उन्होंने दावा किया कि लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक मूल्य खत्म हो रहे हैं, इसलिए वह अब इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं रह सकते।

बंधक बनाने का लगाया आरोप

अग्निहोत्री ने बताया कि वे जिलाधिकारी के आवास पर मिलने गए थे, जहां उन्हें कथित तौर पर 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लखनऊ से फोन आया और उन्हें अपशब्द कहे गए। बाद में एसएसपी के हस्तक्षेप पर उन्हें छोड़ा गया।

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि कोई दुर्व्यवहार या अपशब्द नहीं कहा गया।


आवास कर दिया खाली

अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें दो घंटे के अंदर अपना सरकारी आवास खाली करने को कहा गया है। रात को उन्होंने आवास खाली भी कर दिया । इस बीच, सोमवार दोपहर से बरेली के राज्य अतिथिगृह में ब्राह्मण नेता जमा होने लगे हैं।

शाम को बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम भी उनके आवास पर पहुंचे।महापौर ने UGC नियमों में कुछ कमियां होने की बात मानी और कहा कि इन्हें दूर करने के प्रयास किए जाएंगे। हालांकि, इस्तीफे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इसे गंभीर मुद्दा बताया। शंकराचार्य ने अलंकार से बात कर उन्हें बड़ा पद देने की बात कही है।

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