चीनी सेना 60 किमी अरुणाचल में कथित रूप से घुसने के वीडियो हुए वायरल, PIB Fact Check ने बताया फर्जी

लेंस डेस्क । इन दिनों सोशल मीडिया पर एक दावा वायरल हो रहा था, जिसमें कहा जा रहा था कि चीनी सेना अरुणाचल प्रदेश में भारत की सीमा के अंदर 60 किलोमीटर तक घुस आई है और तक्सिंग क्षेत्र में नया कैंप बना रही है। सोशल मीडिया के हवाले से फैलाई जा रही इस खबर ने लोगों में चिंता पैदा कर दी थी। हालांकि, PIB Fact Check ने इस पूरे दावे को पूरी तरह फर्जी करार दिया है।

PIB Fact Check के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो का भारत-चीन सीमा से कोई लेना-देना नहीं है। ये वीडियो पुराने या किसी अन्य जगह के हैं और इन्हें गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। PIB ने स्पष्ट रूप से कहा है, ‘यह दावा फर्जी है। प्रसारित किए जा रहे वीडियो भारत-चीन सीमा के नहीं हैं और इनका इस दावे से कोई संबंध नहीं है।’

दरअसल हफ्ते पर पहले अरुणाचल प्रदेश से लगी भारत-तिब्बत सीमा पर चीन की ओर से नई सड़क बनाए जाने की तस्वीरें सैटेलाइट इमेज में सामने आई थीं। यह सड़क विवादित क्षेत्र में दो बस्तियों को जोड़ रही है जो 1959 से चीन के नियंत्रण में बताई जाती हैं और वर्तमान में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पार स्थित हैं। इन बस्तियों में हेलिपैड और सीमेंट प्लांट जैसी सुविधाएं भी दिखाई दे रही हैं जिसपर भारत सरकार ने घुसपैठ वाले दावों को साफ तौर पर खारिज कर किया था।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भारतीय सेना ने कहा था कि इस क्षेत्र में सीमा का औपचारिक निर्धारण अभी तक नहीं हुआ है। इसलिए दोनों देशों की LAC को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं। ऐसे में दोनों पक्षों की गश्त कभी-कभी एक-दूसरे के दावे वाले इलाकों तक पहुंच जाती है, जिसे ‘ट्रांसग्रेशन’ कहा जाता है, न कि घुसपैठ।

गौरतलब है कि चीन सीमा क्षेत्र में तेजी से सड़क, गांव और अन्य सुविधाएं बना रहा है, जो भारत के लिए रणनीतिक चुनौती है। बहरहाल भारत भी अरुणाचल प्रदेश में सड़क, सुरंग और अन्य सीमा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेज गति से आगे बढ़ा रहा है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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