ईरान-अमेरिका वार्ता अंतरिम समझौते की ओर मुड़ी, परमाणु कार्यक्रम पर गहरे मतभेद जारी

Iran-US Ceasefire

नेशनल ब्यूरो | नई दिल्ली

अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार अब पूर्ण शांति समझौते की महत्वाकांक्षा कम करके एक अस्थायी मेमोरेंडम पर काम कर रहे हैं, ताकि संघर्ष की ओर वापसी को रोका जा सके। यह जानकारी दो ईरानी सूत्रों ने रॉयटर्स को दी। इस बदलाव से पहले पिछले सप्ताहांत इस्लामाबाद में हुई बेनतीजा वार्ता हुई थी।

परमाणु कार्यक्रम पर मतभेद जारी

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गहरे मतभेद बने हुए हैं।खासकर इसके संवर्धित यूरेनियम स्टॉक के भविष्य और तेहरान को परमाणु कार्य कितने समय के लिए रोकना चाहिए।

इन मुद्दों की वजह से अभी भी वार्ता में प्रगति पर खतरा मंडरा रहा है, भले ही अमेरिकी अधिकारियों, ट्रंप और पाकिस्तानी मध्यस्थों ने संभावनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर बताया हो।एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों ने कुछ मुद्दों पर मतभेद कम करना शुरू कर दिया है, जिसमें हार्मुज जलडमरूमध्य का प्रबंधन भी शामिल है।

यह जलडमरूमध्य दुनिया की लगभग 20% तेल और गैस जरूरतों का महत्वपूर्ण मार्ग है, जो कई हफ्तों से ज्यादातर जहाजों के लिए बंद रहा है।

फंड अनफ्रीज करने की अनुमति

ईरान, जो कई सालों से अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है, चाहता है कि इस ज्ञापन में वाशिंगटन कुछ ईरानी फंड अनफ्रीज करे, इसके बदले में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से ज्यादा जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जाए। यह जानकारी वरिष्ठ अधिकारी ने दी, जिन्होंने मामले की संवेदनशीलता के कारण नाम न बताने की शर्त रखी।

यूरेनियम संवर्धन मुख्य मुद्दा

तेहरान द्वारा ब्रीफ किए गए एक सूत्र ने बुधवार को कहा कि ईरान प्रस्ताव दे रहा है कि अगर स्थायी समझौता हो जाता है तो ओमान की तरफ वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाज बिना हमले के खतरे के स्वतंत्र रूप से गुजर सकें।

लेकिन दो सप्ताह के संघर्षविराम के आधे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी गहरे मतभेद बने हुए हैं। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इनमें ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (HEU) स्टॉक का क्या होगा, और ईरानी परमाणु संवर्धन को कितने समय के लिए रोकना है जिससे मुद्दे शामिल हैं।

ईरान लंबे समय से अमेरिका से मांग कर रहा है कि वह उसके यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को मान्यता दे। तेहरान कहता है कि यह केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि पश्चिमी देश और इजराइल इसे परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बताते हैं।एक पश्चिमी राजनयिक ने कहा कि परमाणु मुद्दा मुख्य बाधा बना हुआ है।

समझौते के लिए 60 दिन का समय

अगर संघर्ष रोकने के लिए ज्ञापन पर सहमति बन जाती है, तो दोनों पक्षों को अंतिम समझौते के लिए 60 दिन का समय मिलेगा, जिसमें विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की भागीदारी जरूरी होगी।

2015 में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और प्रतिबंध हटाने का एक अंतरराष्ट्रीय समझौता हुआ था, लेकिन उसे लगभग दो साल लगे थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में उस समझौते को रद्द कर दिया था।

ईरानी सूत्रों ने कहा कि अमेरिका ईरान के परमाणु संवर्धन कार्य को 20 साल के लिए रोकने की मांग कर रहा है, जबकि ईरान इसे केवल 3 से 5 साल तक सीमित रखना चाहता है। तेहरान संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और यूरोपीय संघ के प्रतिबंध हटाने के लिए समय-सारणी भी चाहता है।

ईरान पहले अमेरिका की मांग को पूरी तरह खारिज कर चुका है कि वह अपना पूरा 60% संवर्धित यूरेनियम स्टॉक विदेश भेज दे।

ईरान विदेश भेज सकता है यूरेनियम

हालांकि, ईरानी सूत्रों ने कहा कि समझौता संभव दिख रहा है। एक सूत्र ने कहा कि हालांकि ईरान अपना सारा अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (HEU) विदेश नहीं भेजना चाहता, लेकिन इसका कुछ हिस्सा तीसरे देश को भेजा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कुछ यूरेनियम चिकित्सा प्रयोजनों और तेहरान के रिसर्च रिएक्टर के लिए जरूरी है, जो लगभग 20% संवर्धित यूरेनियम की छोटी मात्रा पर चलता है।IAEA के अनुसार, जून 2025 में इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु सुविधाओं पर हमले शुरू करने के समय ईरान के पास 440.9 किलोग्राम 60% संवर्धित यूरेनियम था। इसमें से कितना बचा है, यह स्पष्ट नहीं है।

इस्फहान में रखा है यूरेनियम

IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने मार्च में कहा था कि बचा हुआ स्टॉक मुख्य रूप से इस्फहान के टनल कॉम्प्लेक्स में रखा है, और एजेंसी का मानना है कि वहाँ थोड़ा ज्यादा 200 किलोग्राम है। कुछ नाटांज के विशाल परमाणु कॉम्प्लेक्स में भी हो सकता है।एक दूसरे पश्चिमी राजनयिक ने कहा: “440 किलोग्राम HEU चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि इससे ईरान को कई परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा मिल सकती है, क्योंकि अंतिम संवर्धन चरण अपेक्षाकृत तेज होता है।

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