नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर का भारत ने स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने आज जारी बयान में दो सप्ताह के युद्धविराम को सकारात्मक बताते हुए उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सकेगी।
मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत लंबे समय से संघर्ष समाप्त करने के लिए युद्धविराम, संवाद और कूटनीतिक प्रयासों पर जोर देता रहा है। बयान में इस बात को जोर देकर कहा गया है कि हालिया संघर्ष ने आम लोगों को भारी मानवीय पीड़ा पहुंचाई है और साथ ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
विदेश मंत्रालय ने विशेष रूप से हार्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए कहा कि यहां निर्बाध नौवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का सुचारू प्रवाह बना रहना चाहिए। यह जलडमरूमध्य विश्व के तेल व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी जरूरी है।
यह बयान ऐसे समय में जारी किया गया है जब अमेरिका-ईरान के बीच हालिया तनाव के चलते क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई थी। युद्धविराम की इस अस्थायी व्यवस्था में हार्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही के लिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करने का प्रावधान भी शामिल है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को कुछ राहत मिलने की संभावना है।
शहबाज शरीफ ने खाड़ी देशों से क्या कहा

उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद वार्ता की तैयारी के बीच एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा कि हम इस्लामाबाद वार्ता की ओर अग्रसर होते हुए अपने सहयोगी देशों का आभार व्यक्त करते हैं।
प्रधानमंत्री शरीफ ने चीन गणराज्य, सऊदी अरब राज्य, तुर्की गणराज्य, मिस्र अरब गणराज्य और कतर राज्य का विशेष रूप से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इन देशों ने युद्धविराम तक पहुंचने और शांतिपूर्ण कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने के लिए अमूल्य एवं पूर्ण समर्थन प्रदान किया है, जिससे संघर्ष का व्यापक एवं निर्णायक समाधान संभव हो सके।
प्रधानमंत्री ने विश्व भर के सभी भागीदारों और मित्र देशों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने संपर्क साधा और पाकिस्तान के वैश्विक शांति के प्रति सच्चे प्रयासों को स्वीकार किया।









