‘मेडिकल पढ़ाई को विदेश जाने के लिए छात्र स्वतंत्र हैं, लेकिन…’ सुविधाओं की कमी पर क्‍या बोले स्वास्थ्य मंत्री?

December 21, 2025 10:18 PM
Union Health Minister Jagat Prakash Nadda

नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शनिवार को कहा कि मेडिकल की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्र विदेश जाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं कहना चाहिए कि भारत में बुनियादी ढांचे की कमी है। नड्डा ने कहा कि युवा डॉक्टर अब देश में सुविधाओं की कमी की शिकायत नहीं कर सकते। यहां किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के 21वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा, “संस्थान हैं, सुविधाएं हैं और बुनियादी ढांचा भी है। इनका उपयोग करें।”    

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार के तहत देश में अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एआईएमएस) की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। उन्होंने कहा, “पहले जब मेधावी छात्र विदेश जाते थे और उनसे पूछा जाता था कि वे लंदन क्यों जा रहे हैं, तो वे सुविधाओं की कमी की शिकायत करते थे।”

उन्होंने आगे कहा,  “आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि जहां पहले सिर्फ एक एआईएमएस था, वहीं अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 23 एआईएमएस हैं। इसलिए, हमारे छात्र अब सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की कमी की शिकायत नहीं कर सकते।”  “इसीलिए मैं कहता हूं कि नीति निर्माता ही बदलाव लाते है। आज हम न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व की स्वास्थ्य सेवाओं को पूरा कर रहे हैं,” उन्होंने आगे कहा।    

नड्डा ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना 62 करोड़ से अधिक लोगों को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा प्रदान करती है, जिससे यह इस तरह का “विश्व का सबसे बड़ा” कार्यक्रम बन गया है।    

युवा डॉक्टरों को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि स्कूली शिक्षा की तरह चिकित्सा शिक्षा या कोई भी उच्च शिक्षा जन्मसिद्ध अधिकार नहीं है, बल्कि एक विशेषाधिकार है जो बहुत कम लोगों को मिलता है। “इसलिए आपको इस विशेषाधिकार को पहचानना चाहिए और समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।

औसतन, एक डॉक्टर बनाने में 35 लाख रुपये का खर्च आता है,” उन्होंने कहा।     मंत्री ने उन युवा डॉक्टरों की भी प्रशंसा की जो “लगातार 36 घंटे” काम करते हैं और उनसे आग्रह किया कि वे अपने अच्छे काम के लिए कभी भी दूसरों से “प्रमाणपत्र” न मांगें; बल्कि “दृढ़ता और कार्य संतुष्टि” को ही अपना काम करने दें। 

उन्होंने स्नातकों से उभरती हुई तकनीकों से खुद को अपडेट करने और मानवता के लिए काम करने का आह्वान किया।     दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह सहित कई अन्य लोगों ने समारोह को संबोधित किया।

नड्डा ने कहा, “केजीएमयू एक ऐसी जगह है जहां काम करना ही सौभाग्य की बात है। आपके कौशल, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता के बल पर आपने असंभव को संभव कर दिखाया ह  उन्होंने कॉर्निया, लीवर और किडनी प्रत्यारोपण के क्षेत्र में केजीएमयू की उपलब्धियों पर भी बधाई दी।

जेपी नड्डा ने आगे कहा “अगर मैं कहूं कि केजीएमयू ने न केवल राष्ट्र की सेवा की है, बल्कि विश्व भर में मानवता की सेवा की है, तो यह बात और भी पुख्ता हो जाएगी।”यह कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी,” नड्डा ने कहा।   विश्वविद्यालय की कुलाधिपति पटेल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा तभी पूर्ण होती है जब वह करुणा, सहानुभूति और सेवाभाव पर आधारित हो और मानवता के कल्याण का साधन बने।    

जेपी नड्डा ने कहा कि रोगियों के प्रति सहानुभूति, समाज के प्रति उत्तरदायित्व और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना ही एक डॉक्टर की सच्ची पहचान है। उन्होंने आगे कहा कि एक चिकित्सक केवल दवा ही नहीं देता बल्कि विश्वास और भावनात्मक सहारा भी प्रदान करता है, जो किसी मरीज के जीवन की दिशा बदल सकता है।  उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने छात्रों को उनकी डिग्री प्राप्त करने पर बधाई दी।

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