रायपुर। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार रात ट्वीट कर दावा किया कि अडानी समूह के लोग संयंत्र को देखने आने वाले हैं। उन्होंने इस दौरे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘देश बेचने के अभियान’ से जोड़ दिया।
हालांकि इस दौरे की पुष्टि न तो सेल ने की है और न ही अडानी समूह ने लेकिन श्री बघेल की बुधवार रात की X पोस्ट से छत्तीसगढ़ में हड़कंप मच गया है।दरअसल भिलाई इस्पात संयंत्र पहले ही अडानी समूह के साथ एक एमओयू कर चुका है।ऐसे में भूपेश बघेल के आरोपों को गंभीरता से ही देखा जा रहा है।
भूपेश बघेल ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘पता चला है कि अडानी भिलाई इस्पात संयंत्र यानी हमारे बीएसपी को देखने आने वाले हैं।’ उन्होंने सवाल किया, ‘अडानी के बीएसपी आने का क्या मतलब है, समझ रहे हैं ना?’ और खुद ही जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी की नजर अब बीएसपी पर है और उनके ‘प्रिय खरीददार’ मुआयना करने आ रहे हैं।स्पष्ट है कि ‘प्रिय खरीददार’ श्री बघेल ने अडानी के लिए कहा।
बीएसपी को ‘छत्तीसगढ़ की आत्मा’ बताते हुए उन्होंने जोर दिया कि छत्तीसगढ़वासी इसे किसी भी सूरत में बिकने नहीं देंगे। प्रदेश के भाजपा नेताओं से भी उन्होंने कहा कि वे समझ लें, बीएसपी बिकाऊ नहीं है।
प्रेक्षक मानते हैं कि भूपेश बघेल का इशारा पिछले वर्षों में सरकारी संपत्तियों के अडानी समूह के पास जाने के सिलसिले की ओर है।
सबसे बड़ा उदाहरण हवाई अड्डे हैं। 2019 की बोली के बाद भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंगलुरु सहित छह हवाई अड्डे 50 साल की लीज़ पर अडानी को सौंप दिए।
जुलाई 2021 में समूह ने मुंबई हवाई अड्डे में 74 प्रतिशत हिस्सेदारी भी ले ली। दिसंबर 2021 में सरकार ने राज्यसभा में बताया कि पीपीपी मॉडल पर दिए गए आठ हवाई अड्डों में से सात अडानी के पास हैं।
एएआई कर्मचारी संगठनों ने तब इन सौदों पर आरोप लगाया था कि हवाई अड्डे कृत्रिम रूप से कम दरों पर सौंपे गए, जबकि सरकार इन्हें प्रतिस्पर्धी बोली से हुए पीपीपी सौदे बताती रही है।
भिलाई इस्पात संयंत्र के एक कर्मचारी नेता ने कहा कि सेल के लिए निजीकरण कोई नया विषय नहीं है। कंपनी के कर्नाटक स्थित भद्रावती संयंत्र की बिक्री के लिए जुलाई 2019 में LOI यानि रुचि पत्र आमंत्रित किए गए थे, लेकिन बोलीदाताओं की कमी के कारण वह प्रक्रिया रद्द करनी पड़ी।यह भी कहा गया कि बीएसपी की बिक्री की किसी योजना का अब तक कोई सार्वजनिक ऐलान नहीं हुआ है।
भिलाई इस्पात संयंत्र– बीएसपी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया– सेल का प्रमुख संयंत्र है। सोवियत सहयोग से दुर्ग जिले में बने इस संयंत्र में 1959 में उत्पादन शुरू हुआ। इसकी सालाना क्षमता करीब 31.53 लाख टन विक्रेय इस्पात की है। यह रेल पटरियों और भारी प्लेटों का देश का प्रमुख निर्माता है तथा रेलवे की 260 मीटर लंबी सबसे लंबी पटरी का इकलौता आपूर्तिकर्ता भी है। बीएसपी के ऑनलाइन उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस संयंत्र ने वित्त वर्ष 2022-23 में प्लेट उत्पादन में 10 लाख टन का आंकड़ा पार किया और 11 बार प्रधानमंत्री ट्रॉफी जीती है। छत्तीसगढ़ के ही रावघाट और राजहरा की खदानें इसकी कच्चे माल की आपूर्ति का आधार हैं।
सेल के सीएमडी ने हाल ही में रावघाट खदानों की समीक्षा की और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से संयंत्र विस्तार के लिए सहयोग मांगा था।
जानकार कहते हैं कि फिलहाल अडानी और बीएसपी का संबंध गैस आपूर्ति तक सीमित है। अडानी टोटल गैस लिमिटेड ने 14 अगस्त को संयंत्र के साथ पाइप्ड नेचुरल गैस की आपूर्ति का एमओयू किया है। इसके तहत स्टील और रिफ्रैक्ट्री इकाइयों, 30 से अधिक कैंटीनों तथा टाउनशिप के 15,000 से ज्यादा घरों को गैस दी जानी है।
भूपेश बघेल के करीबी सूत्र कहते हैं कि श्री बघेल ने यह पोस्ट उन्हें मिली निश्चित सूचनाओं के आधार पर की है और यदि सरकार इस कथित सौदे की तरफ आगे बढ़ती है तो भूपेश बघेल इसे लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा करने का इरादा रखते हैं।








