रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य पाठ्यपुस्तक निगम के तत्कालीन महाप्रबंधक (GM) अरविंद कुमार पांडेय के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की अब नए सिरे से जांच होगी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (High Court) ने मामले की जांच के लिए गठित आंतरिक शिकायत समिति के गठन को अवैध मानते हुए उसकी रिपोर्ट को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने निगम को नए सिरे से समिति गठित कर मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। याचिका में निगम की ओर से गठित आंतरिक शिकायत समिति की जांच प्रक्रिया और उसकी वैधता को चुनौती दी गई थी।
समिति के गठन में कानून का पालन नहीं
High Court ने पाया कि निगम ने कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम से संबंधित कानून की धारा 4 के प्रावधानों का पालन नहीं किया था। कानून के अनुसार आंतरिक शिकायत समिति में पीठासीन अधिकारी उसी या किसी अन्य विभाग की वरिष्ठ महिला कर्मचारी होनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि यदि समिति का मूल गठन ही कानून के अनुरूप नहीं है, तो उसकी जांच और रिपोर्ट को भी कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पुरानी समिति की जांच रिपोर्ट को निरस्त कर दिया और नए सिरे से जांच कराने का रास्ता साफ किया।
2022 में बनी थी पांच सदस्यीय समिति
खबर के मुताबिक, वर्ष 2022 में निगम के तत्कालीन सीनियर फाइनेंस मैनेजर ने पांच सदस्यीय आंतरिक शिकायत समिति का गठन किया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि समिति के सभी सदस्य आरोपी GM से पद में जूनियर थे। ऐसे में उनके द्वारा की गई जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए।
पीड़िता का आरोप था कि तत्कालीन GM उसे डिक्टेशन और ब्रीफिंग के बहाने केबिन में बुलाते थे। वहां अनुचित दबाव बनाने, भद्दे इशारे करने और आपत्तिजनक प्रस्ताव रखने के आरोप भी लगाए गए थे। परेशान होकर महिला ने अधिकारियों से शिकायत की थी।











