नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने शुक्रवार कहा कि कावेरी जल के बंटवारे के मुद्दे पर कर्नाटक सरकार के साथ बातचीत करने के लिए बेंगलुरु जाने का विचार उनका अपना था।
विधानसभा में कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे और प्रस्तावित मेकेदातु बांध पर विशेष ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘जब दुश्मन देश भी विवाद सुलझाने के लिए बातचीत करते हैं, तो पड़ोसी राज्यों के बीच चर्चा करने में कोई गलत बात नहीं है।’
कानूनी उपायों पर अड़े रहने की बात स्पष्ट करते हुए C. Joseph Vijay ने कहा कि फिर भी उन्होंने बेंगलुरु जाने का प्रयास करना उचित समझा।
उन्होंने कहा, ‘मैंने इसके बारे में सोचा और इसे करने की कोशिश की। मेरे प्रस्तावित बेंगलुरु दौरे पर कई विचार और राय थीं। मैंने इसे समस्या के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा। भले ही उस प्रयास में मुझे अपमान झेलना पड़े, मैं तमिलनाडु के लोगों के लिए तैयार था। जिन्होंने अपना स्नेह और समर्थन व्यक्त किया, मैं उन सभी का आभार व्यक्त करता हूं।’
C. Joseph Vijay ने कहा कि कावेरी राज्य की जीवनरेखा और एक भावनात्मक मुद्दा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार में इसे राजनीतिक बनाने का जरा सा भी इरादा नहीं है। मेकेदातु परियोजना का विरोध करने वाले विधानसभा के सर्वसम्मत प्रस्ताव और उसके बाद प्रधानमंत्री को भेजे जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल यहीं नहीं रोका।
उन्होंने कहा कि जब हमें पता चला कि जल शक्ति राज्य मंत्री ने मेकेदातु मुद्दे पर पूर्ण तथ्य प्रस्तुत नहीं किए हैं, तो हमने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम आदेश और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के संबंधित अंशों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री को फिर से पत्र लिखा। हमने उनसे आग्रह किया कि कर्नाटक को बांध बनाने के लिए प्रशासनिक या कोई अन्य मंजूरी न दी जाए।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि चाहे कावेरी जल का बंटवारा हो या मेकेदातु बांध का निर्माण, उनकी सरकार तमिलनाडु के अधिकारों पर कभी समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा, ‘यह हमारा रुख है। मुद्दे को सावधानी से संभालना चाहिए।’
1969 में कावेरी पर बांध बनाने के कर्नाटक के फैसले पर विधानसभा में हुई बहस का जिक्र करते हुए CM विजय ने पूछा, ‘उस समय जल संसाधन मंत्री कौन थे? मैं सस्ते राजनीति में नहीं उतरता कि कर्नाटक को वे बांध बनाने की अनुमति किसने दी। वह हमारा उद्देश्य नहीं है क्योंकि कावेरी मुद्दे को अत्यंत सावधानी से संभालना चाहिए।’
उन्होंने तत्कालीन विपक्ष के नेता पी.जी. करुथिरुमन की टिप्पणी भी याद की, जिन्होंने कहा था: “हमें इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि किस दल को श्रेय मिले। यह तमिलनाडु के लोगों से जुड़ी समस्या है।श्री विजय ने कहा कि तब विधानसभा में दोनों राज्यों और केंद्र सरकार के बीच चर्चा की जरूरत पर बहस हुई थी।
विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अगर वे नियमित रूप से अखबार पढ़ते, तो उन्हें पता होता कि देश में क्या हो रहा है।’
जवाब में उदयनिधि ने कहा कि केवल अखबार पढ़ना काफी नहीं है। किसानों से बातचीत भी करनी चाहिए और उनकी चिंताओं को समझना चाहिए। इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने में डर या हिचकिचाहट क्यों है?










