रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला और ओवरटाइम घोटाला मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजी गई एक गोपनीय शिकायत ने राज्य की जांच एजेंसी EOW के अफसरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जांच एजेंसी प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए ‘पिक एंड चूज’ नीति अपना रही है और मुख्य आरोपी बताए गए सिद्धार्थ सिंघानिया को अब तक आरोपी नहीं बनाया गया, बल्कि उन्हें ‘अप्रूवर’ बताए जाने का झूठा नैरेटिव तैयार किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के प्रमुख सचिव डॉ. पीके मिश्रा को भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि शराब घोटाला (FIR क्रमांक 04/2024) और ओवरटाइम घोटाला (FIR क्रमांक 44/2024) की जांच में उपलब्ध मनी ट्रेल, गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य सिद्धार्थ सिंघानिया की केंद्रीय भूमिका की ओर इशारा करते हैं। इसके बावजूद ACB/EOW ने उन्हें अब तक आरोपी नहीं बनाया है।
सिद्धार्थ की कंपनी के खातों में जमा हुई अवैध वसूली की रकम
एक उच्च पदस्थ अफसर ने PMO से हुई इस शिकायत की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि कई प्लेसमेंट एजेंसियों ने जांच के दौरान बयान दिए कि कथित अवैध वसूली की रकम M/s Top Securities and Facilities Management के खातों में जमा कराई जाती थी। शिकायत में आरोप है कि इन बयानों और कथित मनी ट्रेल को जांच एजेंसी ने दबा दिया।
शिकायत का सबसे गंभीर आरोप यह है कि ACB/EOW यह प्रचारित कर रही है कि सिद्धार्थ सिंघानिया ‘अप्रूवर’ बन चुके हैं, जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि किसी आरोपी को अप्रूवर बनाने के लिए सक्षम न्यायालय की औपचारिक अनुमति आवश्यक होती है।
शिकायत के अनुसार, इस मामले में ऐसी कोई न्यायिक प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। इसलिए सिद्धार्थ सिंघानिया को अप्रूवर बताना एक ‘फॉल्स नैरेटिव’ है और इससे उनके खिलाफ उपलब्ध कथित साक्ष्यों को दबाने की कोशिश की जा रही है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कथित मनी ट्रेल पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कुछ प्रभावशाली राजनीतिक पदाधिकारियों तक जाती है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भी नाम लिया गया है।
शिकायत में दावा किया गया है कि जांच एजेंसी ने इस दिशा में उपलब्ध कथित साक्ष्यों को आगे नहीं बढ़ाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पूर्व MD ए.पी. त्रिपाठी और अन्य के संबंध में भी आरोप
दस्तावेज में तत्कालीन एमडी ए.पी. त्रिपाठी को शराब सिंडिकेट का प्रमुख वास्तुकार बताते हुए आरोप लगाया गया है कि उनके खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही उनकी पत्नी मंजुलता त्रिपाठी, जिनकी कंपनी रत्नप्रिया आईटी एंड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड का नाम शिकायत में आया है, के सॉफ्टवेयर की फोरेंसिक जांच नहीं कराने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायत में विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल का भी उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इनसे पूछताछ पूरी मनी ट्रेल स्थापित करने के लिए आवश्यक है।
एजेंसी पर वसूली का आरोप
शिकायत में 4 मई 2026 की एक घटना का भी उल्लेख है। आरोप लगाया गया है कि ACB/EOW कार्यालय में प्लेसमेंट एजेंसियों के संचालकों को बुलाकर कथित रूप से 10 करोड़ रुपये की मांग की गई।
शिकायत में कहा गया है कि उस दिन की CCTV फुटेज और प्रवेश-निकास रिकॉर्ड सुरक्षित रखकर पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जानी चाहिए।
शिकायत में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी के ‘हॉट एंड कोल्ड’ और ‘पिक एंड चूज’ रवैये पर प्रारंभिक टिप्पणी की थी। शिकायतकर्ता ने इसे जांच एजेंसी की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाला आधार बताया है।
EOW के अफसरों को हटाने की PMO से मांग
शिकायत में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि ACB/EOW के शीर्ष अधिकारियों की CBI या ED जैसी केंद्रीय एजेंसी से स्वतंत्र जांच कराई जाए।
इसके अलावा 4 मई 2026 की CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखे जाने, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सिद्धार्थ सिंघानिया के खिलाफ कार्रवाई करने, रत्नप्रिया आईटी एंड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के सॉफ्टवेयर का फोरेंसिक ऑडिट कराने और जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ACB/EOW के शीर्ष नेतृत्व में प्रशासनिक बदलाव किए जाने की मांग की गई है।









