‘खालिदा की मौत से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा हो जाए तो ठीक है’ – तसलीमा नसरीन

December 30, 2025 12:24 PM

Tasleema Nasreen on Khalida : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद, निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने एक्स पर एक पोस्ट किया है तसलीमा ने खालिदा जिया के जीवन को सफल बताते हुए उनके साथ अपने पुराने विवादों को भी याद किया। यह पोस्ट खालिदा जिया के निधन की खबर आने के बाद की है, जिसमें तसलीमा ने अपनी किताबों पर लगे प्रतिबंध और अपने लंबे निर्वासन पर सवाल उठाए।

तसलीमा नसरीन ने अपनी पोस्ट में लिखा- ‘खालिदा जिया का निधन हो गया। वे 80 वर्ष की थीं। एक गृहिणी से पार्टी प्रमुख बनीं और देश की प्रधानमंत्री के रूप में दस वर्ष तक सेवा की। उन्होंने एक सफल एक लंबा जीवन जिया। शेख हसीना ने उन्हें दो साल जेल में रखा; उस अवधि को छोड़कर, मुझे नहीं लगता कि 1981 के बाद उन्हें ज्यादा कष्ट हुआ। सभी को बीमारियां होती हैं; उन्हें भी हुईं। मैं सोच रही हूं उनके निधन के साथ, क्या उनकी ओर से लगाए गए किताबों के प्रतिबंध अब हट जाएंगे? उन्हें हटाया जाना चाहिए।
उन्होंने 1993 में मेरी ‘लज्जा’ पर प्रतिबंध लगाया। 2002 में ‘उतल हवा’ पर, 2003 में ‘का’ पर और 2004 में ‘थोज डार्क डेज’ पर प्रतिबंध लगाया। जब वे जीवित थीं, तब उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में खड़े होकर इन प्रतिबंधों को नहीं हटाया। अगर अब उनकी मौत से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा हो जाए, तो ठीक है।1994 में, उन्होंने जिहादियों का पक्ष लेते हुए एक धर्मनिरपेक्ष, मानवतावादी, नारीवादी, स्वतंत्र विचार वाली लेखिका के खिलाफ ‘धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने’ का मुकदमा दर्ज कराया। गिरफ्तारी वारंट जारी किया और फिर अन्यायपूर्ण तरीके से मुझे, मुझ लेखिका को, मेरे अपने देश से निर्वासित कर दिया। उनके शासनकाल में मुझे घर लौटने की अनुमति नहीं दी गई। क्या उनकी मौत से मेरे 31 साल के निर्वासन की सजा समाप्त हो जाएगी? या अन्यायपूर्ण शासक अन्याय को पीढ़ी दर पीढ़ी जारी रखेंगे?”

यह पोस्ट तसलीमा के पुराने दर्द और बांग्लादेश की राजनीति में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर है। तसलीमा नसरीन एक प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखिका हैं, जो महिलाओं के अधिकारों, धर्मनिरपेक्षता और मानवाधिकारों पर अपनी लेखनी के लिए जानी जाती हैं। उनकी किताब ‘लज्जा’ ने 1993 में बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों को लिखा था, जिससे कट्टरपंथी समूह नाराज हो गए थे।

खालिदा जिया बांग्लादेश की सबसे प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में से एक थीं। उनका जन्म 15 अगस्त 1945 को हुआ था और 30 दिसंबर 2025 को लंबी बीमारी के बाद ढाका के एवरकेयर अस्पताल में 80 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। वे बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की संस्थापक अध्यक्ष रहीं।

खालिदा जिया की राजनीतिक यात्रा 1981 में शुरू हुई, जब उनके पति और बांग्लादेश के राष्ट्रपति जियाुर रहमान की हत्या कर दी गई। एक साधारण गृहिणी से वे बीएनपी की प्रमुख बनीं और 1991 में पहली बार प्रधानमंत्री चुनी गईं। उन्होंने 1991-1996 और फिर 2001-2006 तक दो पूर्ण कार्यकाल प्रधानमंत्री के रूप में सेवा की। उनके शासनकाल में बांग्लादेश ने आर्थिक प्रगति देखी, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और उनकी प्रतिद्वंद्वी शेख हसीना के साथ कटु संघर्ष भी रहा।

खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच का प्रतिद्वंद्विता बांग्लादेश की राजनीति को दशकों तक परिभाषित करती रही। बाद के वर्षों में खालिदा को भ्रष्टाचार के मामलों में जेल और नजरबंदी का सामना करना पड़ा, लेकिन 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया और 2025 में कई मामलों में बरी कर दिया गया। लंबी बीमारी के बावजूद, वे आगामी चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाने की योजना बना रही थीं।

तसलीमा नसरीन और खालिदा जिया के बीच का संबंध खालिदा के शासनकाल से जुड़ा है, जब तसलीमा की किताबों पर प्रतिबंध लगाए गए और उन्हें देश छोड़ना पड़ा। तसलीमा का यह पोस्ट बांग्लादेश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक अन्याय के व्यापक मुद्दों को उठाता है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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