नई दिल्ली। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (Paramilitary forces)के सेवानिवृत्त जवानों और अधिकारियों ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है। पूर्व जवानों के संगठनों ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। उनका आरोप है कि नए कानून से अर्धसैनिक बलों के अपने अधिकारियों की पदोन्नति के अवसर कम होंगे और वरिष्ठ पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों का दबदबा बना रहेगा।
7 या 12 नवंबर से भूख हड़ताल की तैयारी
पूर्व अर्धसैनिक बल कल्याण संगठनों की ओर से नवंबर में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में भूख हड़ताल 7 नवंबर से शुरू होने की बात कही गई है, जबकि अन्य रिपोर्टों में 12 से 18 नवंबर तक सांकेतिक भूख हड़ताल का कार्यक्रम बताया गया है। प्रदर्शन की अंतिम तारीख को लेकर संगठनों की ओर से स्पष्ट जानकारी का इंतजार है।
इस आंदोलन में मुख्य रूप से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के पूर्व कर्मियों से जुड़े संगठनों की भागीदारी की बात कही जा रही है।
वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की नियुक्ति का विरोध
पूर्व जवानों की सबसे बड़ी आपत्ति नए कानून में वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से जुड़े प्रावधानों को लेकर है। कानून के मुताबिक, महानिरीक्षक (IG) स्तर के 50 प्रतिशत, अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के कम से कम 67 प्रतिशत और विशेष महानिदेशक तथा महानिदेशक के सभी पद IPS अधिकारियों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
सेवानिवृत्त कर्मियों का कहना है कि अर्धसैनिक बलों में लंबे समय तक सेवा देने वाले अधिकारियों को अपने ही संगठन में शीर्ष पदों तक पहुंचने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाएगा। उनका आरोप है कि यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों की भावना के भी खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला
पूर्व जवानों के संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों में कैडर समीक्षा और IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कम करने के संबंध में निर्देश दिए थे। इसके बावजूद नए कानून में वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान बनाए रखा गया है।
संगठनों ने केंद्र सरकार से कानून पर दोबारा विचार करने और अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों के लिए पदोन्नति के बेहतर अवसर सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो जंतर-मंतर से आंदोलन तेज किया जाएगा।










