नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने बुधवार को जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कथित बर्बरता की जांच की मांग वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से मना कर दिया। वकील नरेंद्र मिश्रा ने CJI सूर्यकांत की बेंच के समक्ष मामले को उठाते हुए कहा कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के वीडियो उपलब्ध हैं। उन्होंने अगले दिन यानी गुरुवार को सुनवाई की अपील की और बताया कि युवा अभी भी जंतर-मंतर पर बैठे हुए हैं।
CJI का जवाब
मुख्य न्यायाधीश ने इस पर कहा, ‘नहीं-नहीं, हमारे पास कल समय नहीं है। हम वीडियो नहीं देखना चाहते। हम समय बर्बाद नहीं करना चाहते।’ वकील द्वारा युवाओं के मुद्दे को फिर से रेखांकित करने पर भी बेंच ने अर्जेंट सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
याचिका में क्या मांगा गया था?
याचिका में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई थीं:
NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार।
प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सिविल ड्रेस में कुछ लोगों ने छात्रों को पीटा, उनके फोन तोड़े और छोटे बच्चों के साथ भी बदसलूकी की गई।
क्या हुआ था प्रदर्शन में?
CJP के नेतृत्व में छात्रों ने NEET परीक्षा में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर लगभग 34 दिन से प्रदर्शन कर रहे थे। सोमवार को संसद की ओर मार्च निकाला गया, जिसके दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज किया। झड़प में कई छात्र घायल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया है।
दिल्ली हाईकोर्ट का भी यही रुख
इससे एक दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इसी मामले में तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।छात्रों की चिंताNEET पेपर लीक से प्रभावित हजारों छात्रों का कहना है कि उनका भविष्य खतरे में है। वे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें आतंकवादी जैसा व्यवहार किया।






