लेंस न्यूज। वैश्विक बाजार में उथल-पुथल और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारतीय रुपये (Rupee and Dollar) में शुक्रवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में रुपया 28 पैसे टूटकर ₹94.69 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time Low) पर पहुंच गया।
इससे पहले इसी हफ्ते रुपया 93.98 रुपए के स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन आज उसने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया।
रुपये की कमजोरी के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार में भी दबाव देखने को मिला।
27 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें सेंसेक्स 1,690.23 अंक (2.25%) गिरकर 73,583.22 पर और निफ्टी 486.85 अंक (2.09%) टूटकर 22,819.60 पर बंद हुआ। इस गिरावट से निवेशकों के लगभग 8-9 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार और दबाव में रहा।
पिछले महीने ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से रुपया करीब 3.5% तक कमजोर हो चुका है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।
क्यों टूट रहा है रुपया?
पश्चिम एशिया युद्ध का असर: West Asia में जारी संघर्ष से तेल सप्लाई पर खतरा बढ़ गया है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।
डॉलर की बढ़ती मांग: वैश्विक संकट के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं। डॉलर मजबूत होने से रुपया कमजोर हो गया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है।
अर्थव्यवस्था पर क्या असर?
रुपये की गिरावट का सीधा असर कई क्षेत्रों पर पड़ता है। आयात (खासकर तेल) महंगा हो जाता है। महंगाई बढ़ने का खतरा है और कंपनियों की लागत बढ़ती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है।
कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, महंगा तेल और विदेशी निवेश की निकासी—तीनों मिलकर रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर पर ले आए हैं, जिससे आने वाले दिनों में बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर दिख सकता है।
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