रायपुर। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के धमतरी जिले में धर्मांतरण से जुड़ा एक मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया। मामला नगरी इलाके के दुगली थाना क्षेत्र के गुहारनाला गांव का है, जहां 70 वर्षीय तितरो बाई के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर गांव में तनाव की स्थिति बन गई। हालांकि प्रशासन ने हस्तक्षेप कर शव को कब्र से निकालने नहीं दिया है। पुलिस दोनों पक्षों की बैठक कर मामले को सुलझाने में लगा है।
परिजनों के अनुसार, तितरो बाई सहित उनके परिवार ने लगभग आठ वर्ष पूर्व ईसाई धर्म अपना लिया था। 3 फरवरी को उनका निधन हो गया, जिसके बाद ईसाई रीति-रिवाज से गांव में ही शव को दफनाया गया।
इसी को लेकर गांव के कुछ ग्रामीणों और आदिवासी समाज के लोगों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि पारंपरिक रूप से गांव में दफनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी।
महिला के दफनाए जाने के बाद ग्रामीणों और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने शव को बाहर निकालने की मांग शुरू कर दी। देखते ही देखते गांव में माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को बिगड़ता देख प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में गांव में बैठक बुलाई गई, जिसमें दोनों पक्षों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
लंबी चर्चा के बाद बैठक में अहम सहमति बनी। अपुष्ट जानकारी के अनुसार, मृतका के पूरे परिवार ने हिंदू धर्म में वापसी पर सहमति जताई। इसके बाद ग्रामीणों और आदिवासी समाज ने भी शव को कब्र से बाहर न निकालने पर सहमति दे दी। प्रशासन की मौजूदगी में पंचनामा की कार्रवाई की जा रही है और फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य बताई जा रही है। हालांकि इस बात की किसी भी आधिकारिक स्तर पर पुष्टि नहीं हो सकी है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
धमतरी में यह पहला मामला नहीं है जब धर्मांतरण और अंतिम संस्कार की परंपरा को लेकर विवाद सामने आया हो। करीब 5 दिन पहले भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जब करीब 15 वर्ष पहले ईसाई धर्म अपना चुके शख्स की मौत के बाद उसे कब्र में दफनाया गया था। ग्रामीणों ने कब्र से शव निकाल लिया था।
इससे पहले कांकेर जिले में भी इसी तरह की घटना सामने आई थी, जहां धर्मांतरित व्यक्ति के अंतिम संस्कार को लेकर गांव में विवाद और सामाजिक तनाव की स्थिति बन गई थी। वहां भी प्रशासन की मध्यस्थता से मामला शांत कराया गया था।
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