रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर कलेक्टर के डेढ़ महीने पहले दिए स्कूलों में बायोमेट्रिक अपडेट को लेकर दिए आदेश ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देशों के खिलाफ बताया जा रहा है। हालांकि कलेक्टर गौरव सिंह का कहना है कि व्यवस्था बनाने के लिए यह आदेश जारी किया गया है।

स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए “Mandatory Biometric Update (MBU)” को अनिवार्य किए जाने संबंधी आदेश पर सवाल खड़े हो गए हैं। कलेक्टर ने 29 दिसंबर 2025 को इस संबंध में आदेश जारी किया था। इस आदेश को न केवल बच्चों की निजता के अधिकार पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों की भी अनदेखी कर रहा है।
आधार की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ‘पुट्टास्वामी फैसले (2018)’ में स्पष्ट किया था कि आधार को किसी भी स्थिति में बच्चों की शिक्षा या बुनियादी सेवाओं से नहीं जोड़ा जा सकता। अदालत ने यह भी कहा था कि आधार न होने के कारण किसी भी बच्चे को स्कूल प्रवेश, मिड-डे मील या अन्य शासकीय लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि आधार एक ‘अधिकार’ हो सकता है, लेकिन यह बच्चों की शिक्षा में ‘रुकावट’ नहीं बनना चाहिए। इसके बावजूद रायपुर कलेक्टर के आदेश में Mandatory Bio Metric Update (BMU) शब्द का बार-बार प्रयोग किया गया है। Mandatory यानी कि अनिवार्य शब्द का इस्तेमाल सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी है।
आदेश में स्कूलों को निर्देशित किया गया है कि वे कैंप लगाकर बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट सुनिश्चित करें। लेकिन इसमें कहीं भी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अभिभावकों की लिखित और सूचित सहमति अनिवार्य होगी। जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जाएं तो नाबालिगों के बायोमेट्रिक डेटा के लिए माता-पिता की स्पष्ट सहमति आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने आधार कानून की धारा 57 को रद्द करते हुए निजी संस्थाओं द्वारा आधार की अनिवार्यता पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद यह आदेश निजी स्कूलों को भी दायरे में लाता है।
कलेक्टर के आदेश के मुताबिक, बच्चों का बायोमेट्रिक डेटा कैंप के माध्यम से एकत्र किया जाएगा, लेकिन डेटा सुरक्षा, स्टोरेज और लीक रोकने के उपायों पर आदेश में कोई ठोस दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि बालिग होने पर व्यक्ति को आधार से बाहर निकलने का अधिकार होना चाहिए। आदेश में 15 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए भी अपडेट को अनिवार्य बताया गया है, लेकिन उन्हें भविष्य के इस अधिकार के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
इस मामले में कलेक्टर गौरव सिंह ने ‘द लेंस’ से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की जानकारी है, लेकिन स्कूल रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह आदेश जारी किया गया है।
35071_2012_Judgement_26-Sep-2018 by news
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