नस्लीय हमले में त्रिपुरा के छात्र की देहरादून में मौत, चीनी नागरिक समझकर नशे में हमलावरों ने अंजाम दी वारदात, दो नाबालिग सहित पांच गिरफ्तार

December 30, 2025 8:59 PM
racial attacks on enjel chakama

लेंस डेस्‍क। देहरादून में एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। त्रिपुरा के 24 साल के एमबीए छात्र एंजेल चकमा की मौत हो गई। मौत की वजह चीनी नागरिक समझकर उनके साथ की गई चाकूबाजी की घटना है।

यह घटना 9 दिसंबर को सेलाकुई इलाके में हुई, जब एंजेल अपने छोटे भाई माइकल के साथ बाजार गए थे। कुछ स्थानीय युवकों से बहस शुरू हुई, जिसमें कथित तौर पर नस्लीय टिप्पणियां की गईं। आरोप है कि हमलावरों ने उन्हें ‘चीनी’ या इससे मिलते-जुलते शब्दों से पुकारा। दोनों भाइयों ने खुद को भारतीय बताया और विरोध किया, लेकिन मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

एंजेल पर तेज धार वाले हथियार और कड़े से हमला किया गया, जिससे उनके सिर, पीठ, गर्दन और रीढ़ में गहरी चोटें आईं। अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार, दाहिनी तरफ लकवा हो गया था और मस्तिष्क में भी गंभीर क्षति हुई थी। उन्हें ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 17 दिनों तक इलाज चला, लेकिन 26 दिसंबर को वे जीवन की जंग हार गए। गवाहों का कहना है कि हमले के दौरान एंजेल बार-बार चिल्ला रहे थे कि वे भारतीय हैं।

देहरादून पुलिस के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि हमलावर नशे में थे और मामला कुछ ही पलों में बिगड़ गया। परिवार की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई और विशेष जांच टीम बनाई गई।

अब तक पांच आरोपियों को पकड़ा जा चुका है, जिनमें दो नाबालिग भी हैं। गिरफ्तार लोगों के नाम अवनीश नेगी, शौर्य राजपूत, सूरज ख्वास, सुमित और आयुष बदोनी हैं। दो नाबालिगों को सुधार गृह भेजा गया है। मुख्य संदिग्ध, जो नेपाल का रहने वाला बताया जा रहा है, फरार है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम रखा है और नेपाल में तलाश के लिए टीम भेजी है।

सीसीटीवी फुटेज में कुछ आरोपी शराब की दुकान के बाहर दिख रहे हैं, जहां विवाद की शुरुआत हुई। हालांकि मारपीट का हिस्सा कैमरे में नहीं आया, लेकिन इसी आधार पर आरोपियों की शिनाख्त हुई।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना को पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया। राज्य सरकार ने गहरी संवेदना जताई है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इसे नफरत से भरा भयानक अपराध बताया। उन्होंने कहा कि नफरत एकाएक नहीं पैदा होती, बल्कि इसे सालों से बढ़ावा मिल रहा है, खासकर युवाओं में जहरीले कंटेंट के जरिए। उन्होंने सत्ताधारी दल पर इसे सामान्य बनाने का आरोप लगाया और कहा कि भारत सम्मान व एकता का देश है, डर और गालियों का नहीं। राहुल ने चकमा परिवार और पूर्वोत्तर के लोगों के साथ संवेदना व्यक्त की।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी इस घटना को दिल दहला देने वाला और अस्वीकार्य बताया। उन्होंने उत्तराखंड के सीएम से अपील की कि दोषियों पर जल्द सख्त एक्शन लिया जाए ताकि परिवार को न्याय मिले।

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