दंतेवाड़ा। देश के प्रमुख खनिज क्षेत्रों में शामिल छत्तीसगढ़ के बस्तर में स्थानीय युवाओं के रोजगार का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बनता दिख रहा है। बैलाडीला की लौह अयस्क खदानों और NMDC जैसी बड़ी सरकारी खनन कंपनी की मौजूदगी वाले दंतेवाड़ा में अब सवाल उठ रहा है कि क्षेत्र की खनिज संपदा से स्थानीय युवाओं को रोजगार का कितना हिस्सा मिल रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी ने अलग-अलग प्रदर्शन किए। कांग्रेस ने बचेली में NMDC प्रबंधन के खिलाफ रैली निकालकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की कथित पुनर्नियुक्ति का विरोध किया, जबकि बसपा ने दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय में स्थानीय रोजगार, बस्तर फाइटर्स की भर्ती और शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
बचेली में जिला कांग्रेस और युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने NMDC की बचेली और किरंदुल परियोजनाओं में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त किए जाने की खबर के विरोध में प्रदर्शन किया।
कांग्रेस का आरोप है कि NMDC में एल-1, एल-2 समेत कई पदों पर नियमित भर्ती लंबे समय से लंबित है। ऐसे में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त करने से स्थानीय बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
कांग्रेस कार्यकर्ता हनुमान मंदिर से रैली निकालकर NMDC चेकपोस्ट पहुंचे। यहां CISF जवानों ने गेट बंद कर दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
करीब एक घंटे बाद NMDC के मुख्य महाप्रबंधक श्रीधर कोडाली धरना स्थल पर पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने उन्हें NMDC के CMD के नाम ज्ञापन सौंपा।
महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव तूलिका कर्मा ने कहा कि बैलाडीला से निकलने वाले खनिज संसाधनों का पहला लाभ क्षेत्र के स्थानीय युवाओं को रोजगार के रूप में मिलना चाहिए। 10 से 15 दिनों के भीतर भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
बस्तर में यह विवाद सिर्फ एक भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। इसके पीछे लंबे समय से चला आ रहा वह सवाल है कि खनिज संपदा से समृद्ध आदिवासी इलाकों में रहने वाले स्थानीय लोगों को विकास और रोजगार का कितना लाभ मिल रहा है।
दंतेवाड़ा और आसपास का बैलाडीला क्षेत्र देश के महत्वपूर्ण लौह अयस्क क्षेत्रों में शामिल है। यहां NMDC की खदानों से बड़े पैमाने पर लौह अयस्क का उत्पादन होता है।
दंतेवाड़ा के युवा कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश दुर्गा ने कहा कि खनन परियोजनाओं से होने वाले आर्थिक लाभ में स्थानीय युवाओं की भागीदारी और रोजगार को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
रोजगार के सवाल पर बसला का जिला मुख्यालय में प्रदर्शन
दूसरी तरफ दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय में बहुजन समाज पार्टी ने भी स्थानीय रोजगार के सवाल पर प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष केशव नेताम के नेतृत्व में कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और राज्यपाल के नाम तीन सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
बसपा ने भी NMDC में सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति रोकने और स्थानीय बेरोजगार युवाओं के लिए नई भर्ती शुरू करने की मांग की।
इसके साथ ही पार्टी ने बस्तर फाइटर्स में 100 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को अवसर देने की मांग उठाई।
बसपा के वरिष्ठ नेता आयतु राम मंडावी ने कहा कि पांचवीं अनुसूची वाले आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। पार्टी ने आउटसोर्सिंग के जरिए होने वाली नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए हैं।
बसपा ने अपने आंदोलन में दंतेवाड़ा की शिक्षा व्यवस्था को भी शामिल किया। पार्टी ने सरकारी स्कूलों और आश्रम-छात्रावासों में शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग की।
इस तरह एक ही दिन हुए दोनों प्रदर्शनों में स्थानीय रोजगार केंद्रीय मुद्दा रहा, लेकिन राजनीतिक दलों ने इसके साथ अलग-अलग सवाल भी जोड़े।
कांग्रेस ने 15 दिन का दिया अल्टीमेटम
बस्तर देश के उन इलाकों में है जहां एक तरफ बड़ी मात्रा में प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय रोजगार, विस्थापन, शिक्षा और विकास में भागीदारी जैसे सवाल लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं।
बैलाडीला की खदानों में लौह अयस्क का खनन होता है और NMDC देश की प्रमुख सरकारी खनन कंपनियों में शामिल है। ऐसे में स्थानीय युवाओं की भर्ती को लेकर उठ रहा सवाल सिर्फ दंतेवाड़ा की राजनीति तक सीमित नहीं है।
यह सवाल देश के दूसरे खनिज संपदा वाले आदिवासी क्षेत्रों में भी उठने वाली उस बहस से जुड़ता है कि स्थानीय समुदायों को प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले आर्थिक लाभ में किस तरह की हिस्सेदारी और रोजगार मिलना चाहिए।
फिलहाल कांग्रेस ने NMDC प्रबंधन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है।








