नई दिल्ली। (Political Apology) “न मा रीरिष:” ऋग्वेद में गलतियों के लिए क्षमा मांगने को एक महत्वपूर्ण गुण माना गया है। जैन धर्म में तो क्षमा पर्व का विशेष महत्व है। जहां तक राजनीति का सवाल है उससे माफी मांगने का भाव खत्म हो गया है लेकिन नहीं भूलना चाहिये कि भारतीय राजनीति का इतिहास क्षमा का इतिहास भी है।
भारतीय राजनीति में तमाम बड़े चेहरों ने समय समय पर अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी है। हमारी संसद में तो हर सत्र में माफी मांगने मंगवाने का रिवाज रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह कम हुआ है। अब आजकल सत्ता पक्ष ही समय समय पर विपक्ष से माफी मांगने को कहता है। दो साल पहले स्मृति ईरानी ने सोनिया गांधी माफी मांगो के नारे से संसद जमकर हंगामा काटा था। रमेश बिधुड़ी के आपत्तिजनक बयान के बाद विपक्ष के सांसद माफी मांगने को कह रहे थे लेकिन उन्होंने माफी नहीं मांगी।
पिछले दो दिनों से राहुल गांधी द्वारा ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर क्षमा मांगने की खबर चर्चा में हैं। राहुल ने पिछले दिनों की अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान एक सिख युवक द्वारा पूछे गये सवाल के जवाब में कांग्रेस के शासन में हुए ऑपरेशन के लिए माफी मांगी है। यह दीगर है कांग्रेस के किसी भी नेता ने आपातकाल को लेकर खुलकर माफी कभी नहीं मांगी यकीनन राहुल गांधी ने कहा कि आपातकाल एक गलती थी।
इसके पहले पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने आपातकाल हटने के बाद खेद व्यक्त किया था। यवतमाल (महाराष्ट्र) में एक बड़ी जनसभा में इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान की गई सभी गलतियों और ज्यादतियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी और घोषणा की कि वह इसकी पूरी जिम्मेदारी लेती हैं।
स्वतंत्र भारत की सर्वाधिक चर्चित राजनीतिक माफी
इतिहास की सर्वाधिक चर्चित माफी पूर्व आरएसएस प्रमुख भाऊराव देवरस द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी से मांगी गई माफी थी। देवरस ने आरएसएस की तरफ से माफी मांगते हुए संघ को जेपी आंदोलन से अलग रखने की बात कही थी साथ में 20 सूत्रीय कार्यक्रम का समर्थन करने का वादा किया था। जहां तक बाबरी विध्वंस का सवाल है इसके लिये पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने घटना के अगले ही दिन 7 दिसंबर 1991 को सांसद में माफी मांगी थी लालकृष्ण आडवाणी ने भी प्रणब रॉय के टीवी शो में विध्वंस के लिए माफी मांगी।
मनमोहन और सोनिया ने जब सिख दंगों को बताया शर्मनाक
1984 के सिख दंगों के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 में संसद में माफी मांगी थी। उन्होंने दंगों को “राष्ट्र के लिए शर्मनाक” बताया और सभी से आत्मावलोकन करने का आग्रह किया ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। प्रियंका गांधी ने 2019 में सिख दंगों को लेकर कहा था कि यदि कांग्रेस पार्टी से किसी की भी इसमें भागीदारी रही हो, तो हमें शर्मिंदा होना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।
सोनिया गांधी ने 27 जनवरी 2013 को न्यायमूर्ति जे. एस. वर्मा से माफी मांगी थी। यह माफी कांग्रेस पार्टी द्वारा दुष्कर्म विरोधी कानूनों में बदलाव के लिए सुझाव देने के लिए मध्यरात्रि में न्यायमूर्ति वर्मा के निवास पर भेजे जाने के कारण थी।
न्यायमूर्ति वर्मा ने इस समय को असामान्य बताया और सोनिया गांधी ने इस पर खेद व्यक्त किया। 2005 में सोनिया गांधी ने सिख दंगों को लेकर कहा था, “हम सिख समुदाय के साथ खड़े हैं और हमें जो हुआ उसके लिए पूरी तरह से दुख है।” प्रियंका गांधी ने भी 2019 में कहा था कि अगर सिख दंगों में कांग्रेस पार्टी का कोई व्यक्ति शामिल था तो वह शर्मनाक था और मैं इसकी निंदा करती हूं।
प्रधानमंत्री मोदी के हिस्से में दो माफीनामे
मोदी ने समय समय पर माफी मांगी है लेकिन विपक्ष और चौतरफा दबाव के वावजूद गुजरात दंगों के लिए माफी ना मांगना ही ज़्यादा चर्चा में रहा है। मोदी की सर्वाधिक चर्चित माफी तीन कृषि कानूनों को लेकर मांगी गई माफी है, जिसके लिए किसानों को एक साल से ज़्यादा समय तक आंदोलन करना पड़ा और जिसमें सैकड़ों किसानों की जाने गईं।
सरकार तमाम कोशिश के बावजूद इन कानूनों को लेकर किसानों से किसी प्रकार का समझौता करने में नाकाम रही और अंततः तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करना पड़ा। पीएम मोदी ने टेलीविजन पर सामने आकर कहा “मैं सच्चे और साफ दिल से देश की जनता से माफी मांगता हूं…हम किसानों को मना नहीं पाए। हमारे प्रयासों में जरूर कोई कमी रही होगी कि हम कुछ किसानों को मना नहीं पाए।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2025 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले ने शिवाजी की मूर्ति गिरने से आहत सभी लोगों से माफी मांगी। 35 फीट ऊंची मूर्ति का गिरना, जिसका अनावरण पीएम मोदी ने महज आठ महीने पहले किया था, वह मामला बेहद चर्चा में था मोदी जी ने उस वक्त शिवाजी महाराज को अपना देवता बताया था। मोदी ने आयुष्मान योजना लागू करते वक्त दिल्ली और बंगाल की जनता से माफी मांगी थी कि हम इन्हें इन राज्यों में लागू नहीं कर पा रहे लेकिन यह माफी राजनीतिक ज़्यादा थी।
राहुल गांधी ने कांग्रेस की गलतियों को लेकर बार–बार मांगी माफी
राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के ऐसे नेता हैं जो माफी मांगने में संकोच नहीं करते हैं। तमाम अवसरों पर उनकी माफी चर्चा में रही है। बतौर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चौकीदार चोर है वाले अपने बयान पर सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी थी।
इसके पहले कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई थी। क्योंकि राहुल ने अवमानना के मामले में दायर किए गए दो हलफनामों में सिर्फ खेद जताया था। 2013 में राहुल गांधी ने अपनी ही सरकार के एक अध्यादेश की कॉपी फाड़ दी थी, उन्होंने अध्यादेश को पूरी तरह बकवास कहा था। बाद में उन्होंने अपनी इस गलती के लिए साल 2018 में गलती मान ली थी और माफी मांग ली थी।
21 अप्रैल को अमेरिका के ब्राउन विश्वविद्यालय में वाटसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स में एक सवाल जवाब के सत्र के दौरान 1984 के दंगों और सिख समुदाय के साथ कांग्रेस के संबंधों से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस द्वारा की गई बहुत सी “गलतियां” तब हुईं जब वह वहां नहीं थे, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने अपने इतिहास में जो भी गलतियां की हैं, उनकी जिम्मेदारी लेने में उन्हें खुशी होगी। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1980 के दशक में जो हुआ वह गलत था। इसके पहले 2014 में उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था “1984 एक त्रासदी थी, जो नहीं होनी चाहिए थी।”
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