नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र (Parliament Updates) का पहला दिन सोमवार को विपक्ष के भारी हंगामे के कारण व्यर्थ चला गया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों को दिन भर में छह बार स्थगित करना पड़ा। विपक्षी सांसद NEET पेपर लीक, CBSE परीक्षा घोटाले और जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चा की मांग कर रहे थे। सदन में कुछ सांसद पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचे, जिससे कार्यवाही बाधित रही। दोपहर 3 बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होते ही हंगामा बढ़ गया और सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
खड़गे ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर उठाया मुद्दा
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां बच्चे भी इकट्ठा हुए थे, लेकिन सरकार उनकी आवाज दबा रही है और उन पर लाठीचार्ज किया गया।
प्रियंका गांधी, वेणुगोपाल और थरूर का हमला
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘हम शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा चाहते हैं। सरकार इसके बजाय छात्रों पर आंसू गैस छोड़ रही है और उनकी पिटाई कर रही है। वे हमारे बच्चे हैं।’ कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर असंवेदनशील होने का आरोप लगाते हुए कहा कि NEET और CBSE पेपर लीक से पूरे देश में माता-पिता चिंतित हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और संसद में विस्तृत चर्चा की मांग रखी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पूछा, ‘ शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठीचार्ज की क्या जरूरत थी? संसद जनता की आवाज सुनने का मंच है। विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए।’
कानून मंत्री ने पेश किया महत्वपूर्ण बिल
हंगामे के बीच लोकसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक पेश किया। इस बिल के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 (मुख्य न्यायाधीश सहित) करने का प्रस्ताव है। यह बिल मई में जारी ऑर्डिनेंस की जगह लेगा। ऑर्डिनेंस लागू होने के बाद पहले ही 5 नए जज नियुक्त किए जा चुके हैं। बिल पास करने के लिए संसद में साधारण बहुमत काफी होगा, संविधान संशोधन की जरूरत नहीं है।
पीएम मोदी का संबोधन
सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मानसून हो या मानसून सत्र, अगर दोनों प्रो-एक्टिव हों तो बहुत प्रोडक्टिव होते हैं। संसद में तर्क के साथ चर्चा होनी चाहिए।’ लोकसभा की कार्यवाही अब मंगलवार को होगी। देखना होगा कि दूसरे दिन सदन में कितनी शांति बनी रहती है और विपक्ष की मांगों पर सरकार क्या रुख अपनाती है।









