आतंकी हमले से पहले कौन खरीद रहा था पहलगाम की सैटेलाइट तस्वीरें…?

Pahalgam satellite images

द लेंस डेस्‍क। आतंकी हमले से दो महीने पहले पहलगाम और आसपास के क्षेत्रों की हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों की बड़े पैमाने पर बिक्री सामने आई है। एक अमरीकी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी ने तस्वीरों के ऑर्डर में अचानक वृद्धि देखी। मैक्‍सास टेक्नोलॉजीज को 2 से 22 फरवरी के बीच 12 ऑर्डर मिले, जो सामान्य से दोगुना है। मैक्सार कंपनी को जून 2024 से पहलगाम की तस्वीरों के ऑर्डर शुरू हुए। ऐसा तब हुआ जब मैक्सार ने एक पाकिस्तानी कंपनी बिजनेस सिस्टम्स इंटरनेशनल (BSI) के साथ साझेदारी की थी। इस कंपनी का अमेरिका में आपराधिक रिकॉर्ड है। मैक्सार टेक्नोलॉजीज की विश्व भर की सरकारी और रक्षा एजेंसिया ग्राहक हैं।

द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि ये ऑर्डर बीएसआई ने दिए थे, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस संयोग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बीएसआई के संस्थापक ओबैदुल्लाह सईद को अमेरिका में पाकिस्तान परमाणु ऊर्जा आयोग (PAEC) को अवैध रूप से उपकरण और सॉफ्टवेयर निर्यात करने के लिए एक साल की जेल हुई थी।

मैक्सार के पोर्टल से पता चला कि पहलगाम के अलावा, पुलवामा, अनंतनाग, पुंछ, राजौरी और बारामूला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की तस्वीरें भी ऑर्डर की गईं। इन तस्वीरों की कीमत 3 लाख रुपये से शुरू होती है और रिजॉल्यूशन के आधार पर बढ़ती है।

एक इसरो वैज्ञानिक ने कहा, “हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इन तस्वीरों का इस्तेमाल 22 अप्रैल के हमले की योजना के लिए हुआ था, लेकिन भारत को मैक्सार से इन ऑर्डर की जांच करने के लिए कहना चाहिए।” हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें सैन्य गतिविधियों, हथियारों की तैनाती और सीमा उल्लंघन की निगरानी के लिए उपयोगी होती हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट (सेवानिवृत्त) ने कहा कि ऐसी तस्वीरों का आसानी से उपलब्ध होना जोखिम पैदा करता है, क्योंकि आतंकी संगठन इनका दुरुपयोग कर सकते हैं। मैक्सार की तस्वीरें 30 से 15 सेंटीमीटर पिक्सल रिजॉल्यूशन की होती हैं, जो बहुत स्पष्ट होती हैं। भारत में रक्षा मंत्रालय और इसरो सहित कई एजेंसियां मैक्सार की सेवाओं का उपयोग करती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मैक्सार जैसी कंपनियों पर कोई बाध्यता नहीं है कि वे केवल भारत को ही सेवाएं दें। भारत अभी अपनी निगरानी प्रणाली विकसित कर रहा है और विदेशी कंपनियों पर निर्भर है। एक सूत्र ने कहा, “भारत को ऐसी कंपनियों पर दबाव डालना चाहिए कि वे पाकिस्तान के साथ काम बंद करें।”

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