Noida Labour Protest: आधी रात को जागी योगी सरकार,  न्यूनतम मजदूरी में इजाफा, जांच में जुटी, पुलिस कैसे हुई हिंसा?

Noida Labour Protest

नोएडा। गारमेंट फैक्ट्री मजदूरों के उग्र प्रदर्शन के बाद हरकत में आई उत्‍तर प्रदेश सरकार ने देर रात न्यूनतम मजदूरी में 1,000-3,000 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा कर दी। यह आदेश 1 अप्रैल पूरे प्रदेश में लागू होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित हाई पावर कमेटी की सिफारिश पर यह शासनादेश जारी किया गया। नोएडा-गाजियाबाद क्षेत्र में अकुशल मजदूरों को 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये मासिक, अर्धकुशल को 15,059 रुपये और कुशल मजदूरों को 16,868 रुपये मिलेंगे।

अन्य नगर निगम क्षेत्रों और बाकी जिलों के लिए भी अलग-अलग दरें तय की गई हैं। (अन्य निगमों में अकुशल: 13,006 रुपये, अर्धकुशल: 14,306 रुपये, कुशल: 16,025 रुपये)। यह बढ़ोतरी लगभग 21 प्रतिशत की है, जो 1,000 से 3,000 रुपये तक के दायरे में आती है। सरकार ने साफ निर्देश दिया कि कोई भी कंपनी इन दरों से कम वेतन नहीं दे सकेगी।

आखिर क्यों आधी रात को फैसला?

सरकार की यह रातों रात हरकत नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे गारमेंट फैक्ट्री मजदूरों के उग्र प्रदर्शन का सीधा नतीजा थी। प्रदर्शन चार दिनों से चल रहा था, लेकिन सोमवार को यह हिंसक हो गया। मजदूर हरियाणा सरकार की हालिया 35 प्रतिशत बढ़ोतरी का हवाला देते हुए 20,000-25,000 रुपये मासिक वेतन, दैनिक 600 रुपये मजदूरी, ओवरटाइम भुगतान, लिखित गारंटी और बेहतर कामकाजी हालात की मांग कर रहे थे। मौजूदा वेतन महंगाई के मुकाबले काफी कम था।

प्रदर्शनकारी सड़कें जाम कर रहे थे, पथराव कर रहे थे, वाहनों में आग लगा रहे थे और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और न्यूनतम बल का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया। हजारों मजदूरों ने सड़कों पर उतरकर यातायात ठप कर दिया।

प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी। इसी दबाव में सीएम योगी ने हाई पावर कमेटी बनाई, जिसकी सिफारिश पर देर रात फैसला लिया गया। उद्देश्य था- श्रमिकों को तुरंत राहत देकर माहौल शांत करना और उद्योगों को आगे नुकसान से बचाना।

नोएडा में अनुमानित श्रमिक

नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) दिल्ली-एनसीआर का बड़ा गारमेंट और फैक्ट्री हब है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आंदोलन के दौरान 83 स्थानों पर लगभग 42,000 कर्मचारी सड़क पर उतरे। यह संख्या मुख्य रूप से गारमेंट, हॉजरी और अन्य फैक्टरियों के मजदूरों की है, जो प्रदर्शन में शामिल हुए। कुल श्रमिकों का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार नोएडा के अपैरल क्लस्टर में दसियों हजार मजदूर काम करते हैं।

कुछ रिपोर्ट्स में क्षेत्रीय स्तर पर लाखों की बात कही जाती है, लेकिन वर्तमान आंदोलन के संदर्भ में 40,000 से 45,000 के आसपास मजदूरों का अनुमान लगाया जा रहा है।

Noida Labour Protest: पुलिस का एक्शन और साजिशका पहलू

पुलिस ने हिंसा को “स्पॉन्टेनियस नहीं, बल्कि प्लान्ड कांस्पिरेसी” बताया है। गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार 300 से अधिक लोग हिरासत में और 200 से अधिक गिरफ्तारियां की गई हैं। 7 एफआईआर दर्ज की गई है, जो तोड़फोड़, आगजनी, पथराव के मामले हैं।

दो एक्स (ट्विटर) हैंडल और एक व्हाट्सएप ग्रुप्स की जांच चल रही है। पुलिस को लग रहा है कि फेक ग्रुप्स बनाकर फर्जी खबरें फैलाई गईं, जिसने हिंसा भड़काने का काम किया। पुलिस का कहना है कि शुरुआती आंदोलन मजदूरों की जायज मांगों पर था, लेकिन इसे “हाईजैक” कर कुछ अराजक तत्वों ने हिंसा का रूप दिया। सोशल मीडिया पर प्रोवोकेटिव मैसेज और बॉट नेटवर्क का इस्तेमाल हुआ। डीजीपी राजीव कृष्णा ने कहा कि माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

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