नई दिल्ली। विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में जमा कर दिया है। यह कदम बजट सत्र के दौरान सदन में लगातार हो रहे हंगामे और गतिरोध के बीच उठाया गया है। खास बात यह है इस नोटिस पर नेता विपक्ष राहुल गांधी और टीएमसी सांसदों के दस्तखत नहीं हैं।
मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया, जिसके कारण प्रश्नकाल नहीं हो सका। महज एक मिनट के भीतर ही सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

इससे पहले इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई थी, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने अन्य दलों से विचार-विमर्श किया। टीएमसी के सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुझाव दिया था कि पहले स्पीकर को लिखित रूप में मांगें सौंपी जाएं, उन पर तीन दिन चर्चा का मौका दिया जाए और यदि संतोषजनक जवाब न मिले तो आगे बढ़ा जाए। संभवतः इसी कारण तृणमूल कांग्रेस ने इस नोटिस पर अपने हस्ताक्षर नहीं किए।

नोटिस नियम 94(सी) के तहत दिया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि स्पीकर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन का संचालन कर रहे हैं, विपक्षी नेताओं खासकर राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा और कई विपक्षी सांसदों को निलंबित किया गया। इस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके समेत अन्य दलों के कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। कांग्रेस के गौरव गोगोई, कोडिकुनिल सुरेश और मोहम्मद जावेद जैसे सांसदों ने इसे लोकसभा महासचिव को सौंपा।
स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिया है कि इस नोटिस की जांच तेजी से की जाए और प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। नोटिस मिलते ही स्पीकर ने खुद को लोकसभा की कार्रवाई से अलग कर लिया और सदन में नहीं आए।
संसदीय नियमों के मुताबिक, नोटिस की वैधता जांचने के बाद कम से कम 14 दिन बाद इसे सदन में चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। हालांकि, इसे पास कराने के लिए लोकसभा की कुल सदस्यता का बहुमत चाहिए, जो विपक्ष के पास फिलहाल नहीं है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि पार्टी ने जो निर्णय लिया है, उसे वे सदस्य के रूप में समर्थन देते हैं। वहीं, भाजपा सांसद रवि किशन ने इसे महज ड्रामा करार दिया और कहा कि असल में इनकी नाराजगी प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की जीत से है, जिससे वे देश और दुनिया में अपनी छवि खराब कर रहे हैं।
क्यों नहीं है राहुल गांधी का साइन
विपक्ष द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपे जाने के बाद खबर के बीच यह भी सामने आया कि इस पर राहुल गांधी के हस्ताक्षर नहीं हैं। नोटिस पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने साइन किए हैं, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके जैसे दल शामिल हैं, लेकिन राहुल गांधी का नाम सूची में नहीं है।
कांग्रेस के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल गांधी द्वारा इस तरह के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं माना गया है। संसदीय लोकतंत्र की मर्यादा के अनुसार, LoP को स्पीकर को हटाने वाली याचिका या नोटिस पर साइन नहीं करना चाहिए। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने नोटिस सौंपते समय पुष्टि की कि यह नियम 94C के तहत दिया गया है, लेकिन राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने का कारण पार्टी स्तर पर तय मर्यादा बताया गया है।









