अयोध्या से the lens के लिए संवाददाता अरुण पांडेय की रिपोर्ट
राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले से उठा बवंडर लगातार बड़ा होता जा रहा है। पहले SIT की 9 पन्ने वाली परम गोपनीय रिपोर्ट लीक हुई। कुछ ही घंटों बाद चंपत राय (Champat Rai) का लिखित बयान भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जो उन्होंने एसआईटी को दिया था।

दोनों दस्तावेज़ों के सार्वजनिक होने से राम मंदिर ट्रस्ट के अंदर गहरी दरार साफ दिखाई देने लगी है। उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग के आदेश पर SIT का गठन किया गया था। 12 जून 2026 को प्राप्त शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई।
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था, CCTV, बैंक प्रक्रिया, MOU और चेन ऑफ कस्टडी जैसे मुद्दों की जांच का जिक्र है। यह दस्तावेज़ “परम गोपनीय” श्रेणी का है।
हालांकि SIT की 9 पन्ने की रिपोर्ट में चंपत राय बंसल का कहीं जिक्र नहीं है, बजाय इसके ट्रस्ट पदाधिकारियों का जिक्र कई बार है और साफ तौर पर एक बार अनिल मिश्रा के नाम का जिक्र है।
चंपत राय का SIT को दिया बयान, जो वायरल है
चंपत राय का SIT को दिया जो लिखित बयान सोशल मीडिया पर वायरल है, उसमें उन्होंने खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया है और व्यवस्था में हुई कमियों की ओर इशारा किया है।
इस बयान में चंपत राय कहते हैं कि उन्हें गिनती प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं दी गई। 13 जून 2026 को उन्हें पत्र मिला, लेकिन उसकी प्रति भी उन्हें सही समय पर नहीं मिली।
उन्होंने 2020 से 2026 तक की अवधि में हुई गिनती पर सवाल उठाया और कहा कि कई बार वे हस्ताक्षरकर्ता नहीं थे।
बयान में कहा गया है कि बैंक की चेस्ट रूम में CCTV था, फिर भी चोरी कैसे हुई? गिनती के दौरान सख्त SOP का पालन क्यों नहीं हुआ?
उन्होंने कहा कि हाउसकीपिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को चुना गया, लेकिन उनकी निगरानी ठीक से नहीं हुई। कुछ लोगों ने नियमों का उल्लंघन किया।
अंत में: चंपत राय ने लिखा कि वे किसी भी गलत काम में शामिल नहीं हैं और पूरी जांच का स्वागत करते हैं।
बयान 6 जुलाई 2026 का है और इसमें उन्होंने महासचिव पद से जुड़ी जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें कई महत्वपूर्ण बातों की जानकारी ही नहीं थी।
ऐसा समझा जा रहा है कि 6 जुलाई को ही चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार होने से पहले यह बयान उन्होंने एसआईटी को दिया होगा।
क्योंकि पत्र के आखिर में चंपत राय खुद को महासचिव लिख रहे हैं और अंत में उनके दस्तखत हैं।
इस पत्र की स्वतंत्र रूप से पुष्टि हम नहीं करते हैं लेकिन यह वायरल होने के बाद माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है।
क्या मायने हैं इन लीक दस्तावेज़ों के?
SIT जैसी संवेदनशील जांच की रिपोर्ट और बयान “परम गोपनीय” होने के बावजूद पब्लिक डोमेन में आ गए। यह सवाल उठाता है कि दस्तावेज़ लीक कौन करवा रहा है और किस मकसद से?
SIT की फाइनल रिपोर्ट अभी आना बाकी है। इन लीक दस्तावेज़ों के बाद ट्रस्ट के अन्य अधिकारियों पर भी दबाव बढ़ेगा। पुलिस में दर्ज एफआईआर के बाद अब यह मामला अदालत में भी चला गया है।









