काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। सोमवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है, जबकि करीब 4,247 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक और करीब 933 हाइड्रोपावर कर्मचारी शामिल हैं। राहत और बचाव दल अब तक 10 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल चुके हैं। सबसे ज्यादा शव चितवन, नवलपरासी पूर्व और नवलपरासी पश्चिम से बरामद हुए हैं।

नुवाकोट-रसुवा में हवाई राहत अभियान तेज
नेपाल सरकार ने नुवाकोट और रसुवा में हवाई राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी अभियान में जुटी हैं। अपर त्रिशूली और चिलिमे समेत कई परियोजनाओं में एयर पाइप और ड्रिलिंग के जरिए रास्ता बनाने की कोशिश जारी है। चिलिमे परियोजना से नौ कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला गया है। वहीं, चितवन में अज्ञात शवों की पहचान के लिए डीएनए नमूने सुरक्षित रखकर करीब 199 शवों का अंतिम संस्कार किया गया है।

सड़कें टूटीं, राहत शिविरों में पहुंचाए जा रहे प्रभावित
आपदा के बाद नेपाल के कई हिस्सों में राहत शिविर बनाए गए हैं। 26 स्थानों पर अस्थायी राहत केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। सड़क और परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। रसुवागढ़ी-केरुंग सीमा मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण मालवाहक ट्रकों का रास्ता बदलकर कोराला की ओर किया गया है। पृथ्वी राजमार्ग पर कृष्णभीर समेत कई जगह भूस्खलन और जमीन धंसने से आवाजाही प्रभावित है। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने लापता और सुरक्षित निकाले गए पर्यटकों की जानकारी के लिए विशेष सूचना डेस्क भी शुरू किया है।

भूकंप नहीं, ग्लेशियर ढहने से शुरू हुई तबाही
वैज्ञानिकों के अनुसार 26 अगस्त की मूल घटना भूकंप नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर बर्फ-पत्थर के हिमस्खलन और ग्लेशियर के ढहने से जुड़ी थी। करीब 5,100 से 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक हिस्सा चट्टानों के साथ नीचे आया और ल्हेंडे खोला नदी को कुछ समय के लिए रोक दिया। इसके बाद बांध टूटने से मलबे से भरी बाढ़ की लहर तेजी से नीचे की ओर बढ़ी। इससे नदी का जलस्तर करीब 30 मिनट में 7 से 9 मीटर तक बढ़ गया।

बारिश और भूस्खलन से बचाव अभियान के सामने चुनौती
नेपाल में मानसून और खराब मौसम के कारण राहत अभियान के सामने नई चुनौतियां बनी हुई हैं। कई इलाकों में बारिश और बादल छाए रहने से भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बना हुआ है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। बढ़ती मौतों और लापता लोगों की संख्या के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और सुरंगों व दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की है।











